अब फैक्ट्री में असेंबल कर फ्लैट बनेंगे...। चौंक गए न आप..., पर सच है यह । लखनऊ विकास प्राधिकरण ने मकान बनाने के लिए थ्रीडी तकनीक पर काम शुरू कर दिया है। प्रधानमंत्री आवास योजना में 12 हजार मकान बनाए जाने हैं। एलडीए ने इस योजना के फ्लैट्स को फैक्ट्र्री में बनाने का फैसला किया है।
बंगलुरू में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर थ्रीडी मकान बनाए जा रहे हैं। प्राधिकरण ने यहीं की कंपनी से राजधानी के लिए भी फैक्ट्री मेड फ्लैट्स का प्रस्ताव मांगा है। इस तकनीक से कमरे, टॉयलेट व सीढ़ियों का ढांचा फैक्ट्री में तैयार किया जाएगा और साइट पर लाकर उसे जोड़ दिया जाएगा।
एलडीए के प्रस्ताव पर काम कर रही कंपनी के इंजीनियर्स का दावा है कि यह परंपरागत तरीके से सस्ता और बेहतर काम होगा। इसकी वजह यह है कि सीमेंट और कंक्रीट के अलावा इसमें फ्लाईएश का भी उपयोग किया जा रहा है। यह दीवारों को बेहतर संतुलन देने के साथ ही हल्का और लागत में सस्ता बनाने का काम करता है।
कम्प्यूटर-टीवी ही नहीं....अब मकानों की भी होगी असेंबलिंग
आपने कम्प्यूटर-टेलीविजन के पुर्जे-पुर्जे को जोड़कर यानी असेंबलिंग करने के बारे में तो सुना होगा। थ्रीडी तकनीक से मकान की भी असेंबलिंग होगी। यानी कारखाने में एक फ्लैट का हर हिस्सा अलग-अलग तैयार किया जाएगा और फिर उसे साइट पर लाकर जोड़ दिया जाएगा।
अभी चार मंजिल तक ही बनेंगे आवास, छह फ्लैट रोज
कारखाने में ढांचा तैयार करना प्री-कास्ट कहलाता है। इसके जरिए आठ से दस मंजिल तक निर्माण संभव है, पर एलडीए फिलहाल चार मंजिल (जी प्लस थ्री) आवास ही बनाएगा। हालांकि इंजीनियर्स का कहना है दस मंजिल से अधिक निर्माण में दिक्कत आ सकती है। प्री-कास्ट कर आवास बनाने वाली बंगलुरू की कंपनी ने एलडीए से कहा है कि रोजाना पांच से छह यूनिट आवास बनाए जा सकते हैं।
ऐसे होगी असेंबलिंग
- फैक्ट्री में मकान के अलग-अलग हिस्सों का ढांचा बनाया जाएगा।
- सभी अलग-अलग भाग को ट्रांसपोर्ट कर प्रोजेक्ट साइट पर ले जाया जाएगा
- यहां प्रशिक्षित टीम इन्हें असेंबल करने का काम करेगी
- असेंबलिंग का काम पूरा होने के बाद टॉयलेट, सिंक, खिड़की, दरवाजे को फिट कर दिया जाएगा
- पहले से दी गई जगह में बिजली, वाटर, वेस्टवाटर या सीवर के कनेक्शन कर फ्लैट तैयार कर दिया जाएगा