अमेठी के गौरीगंज एसडीएम कोर्ट ने बुधवार को कौहार गांव की 49.84 हेक्टेयर जमीन पर सम्राट साइकिल लिमिटेड का दावा खारिज कर दिया। आदेश दिया कि इस जमीन पर मालिकाना हक उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड (यूपीएसआईडीसी) का है।
मालूम हो कि सम्राट साइकिल ने यह जमीन करीब तीन दशक पहले ली थी। इसमें से 65.57 एकड़ राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट ने नीलामी के जरिये सम्राट साइकिल से खरीदी थी।
इसके मद्देनजर केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी ने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी पर किसानों की जमीन हड़पने का आरोप लगाया था। कोर्ट का यह फैसला कांग्रेस के लिए झटका माना जा रहा है।
यूपीएसआईडीसी ने नवंबर 2014 में गौरीगंज की एसडीएम कोर्ट में मुकदमा दायर किया था। आरोप था कि सम्राट साइकिल कौहार ने उनकी 49.84 हेक्टेयर जमीन गलत तरीके से राजस्व अभिलेखों में अपने नाम दर्ज करवा ली है।
निगम का कहना था कि उसके प्रार्थना पत्र पर सरकार ने जमीन का अर्जन उसके पक्ष में किया था। निगम का दावा था कि उसकी जिस 49.84 हेक्टेयर भूमि सम्राट साइकिल ने अपने नाम करवा ली है उसे निगम ने वर्ष 1986 में मात्र 65.57 एकड़ लीज पर दी थी।
अफसरों व कर्मचारियों की मिलीभगत से ली जमीन
कंपनी ने इस लीज की आड़ में राजस्व कर्मचारियों व अधिकारियों की मिलीभगत से पूरी 49.84 हेक्टेयर जमीन अपने नाम करवा ली। निगम ने इस संबंध में तमाम साक्ष्य भी कोर्ट में प्रस्तुत किए। अदालत में पेश सुबूतों और नायब तहसीलदार गौरीगंज की ओर से 17 अगस्त 2015 को सौंपी गई जांच रिपोर्ट के आधार पर बुधवार को एसडीएम वंदिता श्रीवस्तव ने अपना फैसला दिया।
जमीन का मालिकाना हक तय करने तक ही मतलब : डीएम
डीएम जगतराज त्रिपाठी ने एसडीएम कोर्ट के फैसले का राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट पर क्या असर होगा, इस पर कुछ भी कहने से इन्कार कर दिया।
डीएम ने कहा कि जिला प्रशासन का मतलब सिर्फ जमीन के मालिकाना हक तय करने तक था। नीलामी हो सकती है या नहीं इसके बारे में यूपीएसआईडीसी के अधिकारी ही बेहतर बता सकते हैं।
एसडीएम को सौंपी मामले की जांच
डीएम जगतराज त्रिपाठी ने यूपीएसआईडीसी की जमीन की धोखाधड़ी में सम्राट साइकिल लिमिटेड का सहयोग करने वाले राजस्व कर्मचारियों की जांच एसडीएम गौरीगंज को सौंपी है।
डीएम ने कहा कि एसडीएम की रिपोर्ट मिलने के बाद यदि मामले में तत्कालीन लेखपाल, कानूनगो, नायब तहसीलदार, तहसीलदार और एसडीएम की भूमिका सामने आई तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
फैसले का नीलामी पर नहीं पड़ेगा असर
यूपीएसआईडीसी के रीजनल मैनेजर आरएस पाठक ने एसडीएम कोर्ट के फैसले के बाद कहा कि इसका नीलामी प्रक्रिया से कोई लेना-देना नहीं है।
निगम की ओर से 90 वर्ष के लीज पर ली गई जमीन को बंधक बनाकर सम्राट साइकिल ने ऋण लिया था, जिसे वह दिवालिया होने के कारण अदा नहीं कर सका। ऐसे में ऋण देने वाला बैंक कोर्ट के आदेश पर बंधक भूमि की नीलामी कर सकता था।
कंपनी ने 9.46 लाख में ली थी जमीन
राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट ने औद्योगिक क्षेत्र कौहार स्थित सम्राट साइकिल लिमिटेड की जिस 65.57 एकड़ जमीन को नीलामी के जरिए 20.10 करोड़ में लिया उसे कंपनी ने मात्र 9 लाख 46 हजार 608 रुपये 51 पैसे में लिया था।
निगम की ओर से कंपनी को इस भूमि का अलॉटमेंट चार जुलाई 1984 तथा लीज का निष्पादन आठ अगस्त 1986 को किया गया था।
स्मृति ने लगाया था आरोप, कांग्रेस ने दिया था जवाब
जिस 65 एकड़ की जमीन पर एसडीएम कोर्ट ने बुधवार को फैसला सुनाया है इसी पर पिछले एक सप्ताह से कांग्रेस और भाजपा के बीच तीखे बयानों का आदान-प्रदान हो रहा है।
23 अगस्त को अमेठी पहुंची स्मृति ईरानी ने कांग्रेस पर इसी जमीन को लेकर तीखा हमला बोला था। उन्होंने कहा था कि कांग्रेस और राहुल गांधी ने यहां के किसानों की 65 एकड़ जमीन हड़प ली है।
सम्राट साइकिल की फैक्ट्री की इस जमीन को हड़पने के आरोप का कांग्रेस ने जवाब दिया था। कांग्रेस ने कहा था कि यह जमीन हड़पी नहीं गई है बल्कि राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट ने इसे नीलामी में खरीदा है।
1980 में सम्राट साइकिल फैक्ट्री लगाने के नाम पर यह जमीन दी गई थी लेकिन इसे 24 फरवरी 2015 को राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट ने खरीद लिया।
राहुल पर लगे आरोपों के बचाव में खुद उप्र कांग्रेस कमेटी के नेता आए थे। कांग्रेस कम्युनिकेशन विभाग के चेयरमैन सत्यदेव त्रिपाठी ने इन आरोपों का जवाब देते हुए कहा, कांग्रेस ने कोई जमीन नहीं हड़पी है।