लखनऊ। रिवर फ्रंट पर लगे गोमती पुस्तक महोत्सव में इस बार ब्रेल लिपि से लेकर डिजिटल क्यू आर कोड वाली किताबें ट्रेंड में हैं। वहीं, गीत-संगीत से लेकर विज्ञान और एडवांस बिजनेस समेत स्प्रिचुअल मोटिवेशनल किताबों की भी मांग लगातार बनी हुई है।
प्रकाशक बताते हैं कि बच्चों और किशोरों को ध्यान में रखते हुए सबसे ज्यादा किताबें लिखी जा रही हैं जिससे कि उनमें भी किताबों को पढ़ने की रुचि जागे। रंग-बिरंगे स्टॉलों पर रविवार को खूब रौनक रही। शहरवासी अपने परिवार समेत पहुंचे और देशभर से आए प्रकाशकों के स्टॉलों पर साहित्य, संगीत से लेकर विज्ञान, व्यवसाय और मोटिवेशनल किताबों के पन्ने पलटकर देखे। पसंदीदा किताबों की खरीदारी भी की।
पुस्तक महोत्सव के प्रवेश द्वार पर ही नेशनल बुक ट्रस्ट और दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के संयुक्त प्रयास से ब्रेल लिपि की किताबों का स्टॉल लगा है, जिसमें सेवा दे रहे अनिमेष मिश्रा ने बताया कि 10-12 लोगों को पुस्तकें दी गई हैं। दिव्यांगजन भी महाश्वेता देवी की कहानियां, गर्म पहाड़, एग्जाम वॉरियर आदि किताबों को पसंद कर रहे हैं।
महोत्सव में क्यूआर कोड वाली किताबें भी डिमांड में हैं। प्रकाशक गौरीशंकर चौबे बताते हैं कि वह एक से 12वीं तक की स्कूली किताबें प्रकाशित करते हैं। बच्चे व किशोर उन किताबों की डिमांड करते हैं, जिन पर क्यूआर कोड छपा होता है। इससे हाथ में किताब न होने पर भी यात्रा के दौरान क्यूआर कोड स्कैन कर बच्चे सीधे ऑनलाइन लिंक के जरिये उसी चैप्टर पर पहुंच जाते हैं। इससे उन्हें हर जगह किताब ले जाने की जरूरत नहीं पड़ती। ऐसी किताबें ज्यादा पसंद की जा रही हैं, जिनमें डिजिटल सपोर्ट भी हो।
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...ताकि बच्चे अपनी जड़ों से जुड़े रहें
देश के अलग-अलग हिस्सों की ऐसी विभूतियां जिनसे बच्चे परिचित नहीं हैं। उनके लिए नोएडा की तूलिका सिंह किताबें लिख रही हैं। हनुमान चालीसा, तैलंग स्वामी, गणपति बप्पा मोर्या, वारियर गॉड, 24 टीचर्स, गामा पहलवान आदि किताबों में नई जानकारियां हैं। उन्होंने बताया कि पहले उनका सिंगापुर में बच्चों से जुड़ा बिजनेस था। बच्चे, देश के अनजाने हीरो को भी पहचानें, इसलिए ऐसी किताबें लिखीं।
नृत्य, कला व संगीत में भी नई किताबें
नृत्य कला व संगीत के क्षेत्र में नई किताबों में भी पाठक रुचि ले रहे हैं। अंग्रेजी संस्करण में संगीत नाटक अकादमी का नया जरनल आया है। नाट्य मंडपम और कुट्टमपलम भी पसंद की जा रही है। हिंदी में डॉ. बद्री प्रसाद की झूमर किताब को भी खूब पसंद किया जा रहा है। इसमें देशभर के गीत-संगीत व नृत्य का विस्तार है। 10 हजार का छह खंडों का पूरा अंक पांच हजार रुपये में मिल रहा है।