लखनऊ। संजय गांधी पीजीआई की डाॅ. पियाली भट्टाचार्य के मुताबिक, बच्चों में कुपोषण से बड़ी समस्या अब मोटापा बन गया है। यूनिसेफ की चाइल्ड न्यूट्रीशन ग्लोबल रिपोर्ट-2025 के अनुसार 9.4 फीसदी बच्चे मोटापे और 9.2 फीसदी कुपोषण पीड़ित हैं। डाॅ. पियाली भट्टाचार्य शुक्रवार को हजरतगंज स्थित होटल में प्रदेश सरकार और यूनिसेफ के सहयोग से किशोर-किशोरियों के लिए हुई राज्यस्तरीय कार्यशाला में बोल रहीं थीं।
डाॅ. पियाली भट्टाचार्य ने बताया कि बच्चे जंक फूड खाना चाहते हैं। ऐसे में बच्चों को छह दिन पाैष्टिक भोजन देने के बाद सातवें दिन संतुलित मात्रा में जंक फूड खाने की इजाजत देनी चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि पांच साल तक के बच्चे को दिन में आधा कप और नाै साल तक के बच्चे को दिन में एक कप से ज्यादा चाय नहीं पीनी चाहिए। जूस पीने के बजाय फल खाने को प्राथमिकता देनी चाहिए। डिब्बाबंद जूस पीने से बचना चाहिए। इनमें फलों के रस के बजाय अन्य पदार्थ की मात्रा ज्यादा होती है।
इससे पहले कार्यक्रम का शुभारंभ महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव लीना जाैहरी, शिक्षा विभाग की महानिदेशक कंचन वर्मा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, मातृ स्वास्थ्य की संयुक्त निदेशक डॉ. शालू, यूनिसेफ के कार्यक्रम प्रबंधक अमित मेहरोत्रा, राज्य टीकाकरण अधिकारी डॉ. अजय गुप्ता, केजीएमयू की डॉ. मोनिका अग्रवाल ने दीप जलाकर किया।
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बच्चों में पोषण का होगा आकलन
यूनिसेफ के कार्यक्रम प्रबंधक अमित मेहरोत्रा ने कहा कि यूनिसेफ की ओर से प्रदेश के कुछ चयनित स्कूली बच्चों में पोषण आकलन किया जाएगा। इसकी रिपोर्ट के आधार सरकार को नीतिगत निर्णय लेने में मदद मिलेगी।
स्कूल के 500 मीटर दायरे में प्रतिबंधित हो जंक फूड
इंडियन काउंसिल फाॅर मेडिकल रिसर्च की वैज्ञानिक डाॅ. प्रियंका बंसल ने एनीमिया और कुपोषण पर हो रहे शोध के बारे में बताते हुए कहा कि स्कूल के 500 मीटर दायरे में जंक फूड प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। पोषण कार्यक्रमों को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून से भी जोड़ना चाहिए।
पांच आदतें बढ़ा रहीं मोटापा
- रात में देर से सोना
- गैर-स्वास्थ्यवर्धक भोजन
- खराब जीवनशैली
- ज्यादा स्क्रीन टाइम
- एनीमिया
प्रदेश सरकार और यूनिसेफ के सहयोग से हुआ कार्यक्रम।
प्रदेश सरकार और यूनिसेफ के सहयोग से हुआ कार्यक्रम।