आरटीई में दाखिला न देने वाले स्कूलों पर दर्ज होगा आपराधिक केस
सीडीओ ने प्रवेश देने में लापरवाह स्कूलों को दी चेतावनी
शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के अंतर्गत बच्चों को दाखिला न देने वाले स्कूलों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा भी दर्ज किया जा सकता है। कलेक्ट्रेट स्थित एपीजे अब्दुल कलाम सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में सीडीओ मनीष बंसल ने दाखिला देने में लापरवाही करने वाले स्कूलों को चेतावनी दी है। दाखिला न देने वाले स्कूलों की मान्यता समाप्त करने की कार्रवाई की जाएगी। बैठक में करीब 229 स्कूलों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
सीडीओ ने साफ तौर पर कहा कि आरटीई के तहत आवंटित छात्रों को निशुल्क दाखिला देना अनिवार्य है। प्रथम चरण की प्रक्रिया के तहत 10,586 बच्चे दाखिले के लिए स्कूलों को आवंटित किए गए। इनमें काफी बच्चों को स्कूलों ने दाखिला देने से मना कर दिया है। कई स्कूलों ने विभाग से बच्चों की सूची न मिलने, अपात्र बच्चे होने, गलत पते होने आदि का तर्क दिया है। अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि कितने बच्चों का दाखिला हो पाया है। सीडीओ ने स्कूलों को एक हफ्ते में दाखिला देने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि जो बच्चे अपात्र हैं, उनके संबंध में स्कूल प्रशासन को बेसिक शिक्षा अधिकारी को साक्ष्य उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। दूसरे चरण की सूची भी जारी कर स्कूलों को भेज दी जाएगी। उन छात्रों को पांच अगस्त तक दाखिला देना है। सीडीओ ने साफ कहा है कि दाखिला न देने वाले स्कूलों की एनओसी समाप्त कर दी जाएगी और मान्यता खत्म करने की कार्रवाई की जाएगी। स्कूलों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा भी दर्ज कराया जा सकता है।
18 स्कूलों को चेतावनी
बैठक में आरटीई के दाखिले की समीक्षा की गई। शहर के 18 स्कूल दाखिला देने में आनाकानी कर रहे हैं। इन सभी को चेतावनी देते हुए एक हफ्ते में दाखिला देने का निर्देश दिया है। इन स्कूलों में सेंट जोसफ स्कूल, सिटी मॉन्टेसरी स्कूल, टेंडर हार्ट स्कूल, लोयला इंटरनेशनल स्कूल, नवयुग रेडियंस स्कूल, बाल विद्या मंदिर चारबाग, ब्लूमिंग फ्लावर, लखनऊ पब्लिक स्कूल, राजकुमार एकेडमी, शिशु विद्या पीठ, लखनऊ मॉडल स्कूल, ब्राइट लैंड इंटर कॉलेज, न्यू पब्लिक स्कूल और ब्राइट वे स्कूल डालीगंज शामिल हैं। इनमें कुछ स्कूलों की एक से अधिक शाखाएं शामिल हैं।