जेई-पीवे के 12 पदों पर प्रमोशन के लिए कीमैन, गेटमैन, ट्रैकमैन आदि के लिए 23 फरवरी को लिखित परीक्षा हुई थी। इसमें करीब दो सौ रेलकर्मी शामिल हुए थे। परीक्षा का परिणाम चार अक्तूबर को जारी हुआ और चयनित रेलकर्मियों की जो सूची जारी की गई थी, उसमें शाम तक फेरबदल कर दिया गया।
सूची में 11वें नंबर के रेलकर्मी रंजन कुमार सिंह (गेटमैन, ऊंचाहार) की जगह रंजन सिंह (कीमैन, लखनऊ) कर दिया गया। इसे लेकर रेलवे एसोसिएशनों ने भी नाराजगी जताई थी। परीक्षा निरस्त होने के आदेश 18 नवंबर को जारी किए गए हैं।
इस परीक्षा को लेकर बवाल नया नहीं है। 2017 से इसमें धांधलियों के मामले सामने आ रहे हैं। 2017 में लिखित परीक्षा का नोटिफिकेशन आया। हालांकि, परीक्षा से एक दिन पहले धांधलियों के चलते इन्क्वायरी शुरू हो गई, जो डेढ़ साल तक चली। इसके बाद फरवरी, 19 में लिखित परीक्षा करवाई गई, जिसका परिणाम निकालने में अधिकारियों ने आठ माह लगा दिए, जो जांच का विषय है।
आखिर कब होगी कार्रवाई
जेई-पीवे की परीक्षा मामले में कार्मिक विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार के उजागर होने की संभावनाएं थीं। पर, अभी तक ऐसा नहीं हुआ है। दरअसल, परीक्षा निरस्त कर दी गई है। हालांकि, धांधली व मनमाने ढंग से रेलकर्मी का नाम जोड़ने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई करने से बचा गया है। ऐसे में रेलवे एसोसिएशन इस प्रकरण को बोर्ड तक ले जाने की तैयारी कर रही हैं।