कैबिनेट की बैठक में शामिल होकर लौटते सीएम योगी
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नोएडा की बिजली व्यवस्था और बेहतर बनाने के लिए राज्य सरकार ने नोएडा में 400 केवी के नए ट्रांसमिशन उपकेंद्रों के निर्माण को मंजूरी दी है। नोएडा के सेक्टर 148 व 123 में 400 केवी ट्रांसमिशन उपकेंद्र का निर्माण कराया जाएगा।
इसी के साथ नोएडा के सेक्टर 148 उपकेंद्र से सेक्टर 123 उपकेंद्र तक 400 केवी मोनोपोल डीसी (डबल सर्किट) लाइन के निर्माण को भी मंजूरी दे दी गई है।
इसके अलावा पूर्वांचल की बिजली व्यवस्था बेहतर करने के लिए बस्ती जिले के के भौखरी में 400 केवी उपकेंद्र व उससे संबंधित लाइनों के निर्माण को भी मंजूरी दे दी गई है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में उपकेंद्र व उससे संबंधित लाइनों का निर्माण तय समयसीमा में कराने के लिए सभी कार्य नोएडा प्राधिकरण द्वारा ‘जहां हैं, जैसे हैं’ के आधार पर यूपी पावर ट्रांसमिशन कार्पोरेशन को हस्तांतरित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी गई।
नोएडा के सेक्टर 148 में 400 केवी उपकेंद्र के निर्माण पर 165.57 करोड़ तथा सेक्टर 123 के उपकेंद्र पर 141.41 करोड़ की लागत अनुमानित है। इसके अलावा सेक्टर 148 से सेक्टर 123 तक डीसी लाइन के निर्माण पर 98.35 करोड़ रुपये खर्च होंगे। तीनों को मिलाकर नोएडा में बिजली व्यवस्था और बेहतर बनाने पर 405.33 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
कैबिनेट के फैसले के अनुसार नोएडा प्राधिकरण में जमा धनराशि के जरिये 220 केवी के ट्रांसमिशन नेटवर्क के कार्य को शामिल करते हुए परियोजना की कुल लागत 796.95 करोड़ रुपये होगी।
400 केवी ट्रांसमिशन तंत्र के निर्माण में आने वाली लागत 405.33 करोड़ में 70 प्रतिशत धनराशि की व्यवस्था वित्तीय संस्थाओं के बतौर ऋण ली जाएगी जबकि 30 प्रतिशत धनराशि शासकीय अंशपूंजी होगी।
पूर्वांचल बिजली व्यवस्था होगी चौकस
पूर्वी उत्तर प्रदेश के गोरखपुर, बस्ती, सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर, महराजगंज तथा आसपास के क्षेत्रों की बिजली व्यवस्था और बेहतर करने के लिए कैबिनेट ने बस्ती जिले को भौखरी में 400 केवी उपकेंद्र के निर्माण को भी मंजूरी दी है।
टांडा (विस्तार) तापीय परियोजना से उत्पादित बिजली की निकासी भी इसी ट्रांसमिशन नेटवर्क के जरिये होगी। इस उपकेंद्र और उससे संबंधित लाइनों के निर्माण पर 829.59 करोड़ रुपये की लागत अनुमानित है।
सरकार का दावा है कि इस उपकेंद्र और ट्रांसमिशन लाइन के बन जाने के बाद गोरखपुर, बस्ती, सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर महराजगंज तथा आसपास के क्षेत्रों में पर्याप्त बिजली उपलब्ध हो सकेगी। इससे पूर्वांचल में औद्योगिक, वाणिज्यिक व आवासीय गतिविधियों कोभी बढ़ावा मिलेगा।