लखनऊ। एलडीए की प्रियदर्शिनी और जानकीपुरम योजना में नियम-कानून ताक पर रखकर 47 प्लॉट बांट दिए गए। इनमें से 39 की फाइलें तक गायब हैं। इस पूरे गोलमाल की जांच कर रही विजिलेंस का दबाव बढ़ने के बाद एलडीए जागा। दो टीमें बनाकर जांच शुरू कराई तो सिर्फ आठ भूखंडों की ही फाइलें मिलीं।
करीब 10 साल पहले इन योजनाओं के कई आवंटियों ने विजिलेंस में शिकायत दर्ज कराई थी कि उन्हें जो प्लॉट आवंटित किया गया था, एलडीए के अधिकारियों ने उनकी सहमति लिए बिना ही उन्हें परिवर्तित कर दिया है। शासन स्तर से विजिलेंस से गोपनीय जांच कराई तो पाया कि एलडीए के अभियंताओं व अधिकारियों ने योजना में आवंटित प्लॉटों के परिवर्तन में बड़े पैमाने पर घालमेल किया है। ऐसे 47 मामले सामने आए थे। जांच में प्रथम दृष्टया अनियमितता पाए जाने पर सरकार ने ऐसी सभी शिकायतों की जांच विजिलेंस को सौंप दी थी।
गोलमाल पर ऐसा रवैया...
फरवरी 2018 से अब तक 12 बार मांगी फाइलें, सोता रहा एलडीए
विजिलेंस ने फरवरी 2018 से अब तक 12 बार एलडीए से संबंधित फाइलें मांगीं, लेकिन उसे नहीं मिलीं। जांच अधिकारी अपर पुलिस अधीक्षक (सिंचाई प्रकोष्ठ) की ओर से सात बार एलडीए वीसी के अलावा नोडल अधिकारी व संयुक्त सचिव को पत्र लिखा गया। इसके अलावा पुलिस अधीक्षक व विवेचना अधिकारी की ओर से दो और विशेष निदेशक के स्तर से भी तीन बार पत्र लिखा गया। ऐसे में डीजी विजिलेंस हितेश अवस्थी ने प्रमुख सचिव आवास दीपक कुमार को पत्र लिखा और कहा कि अगर फाइलें नहीं मिलीं तो उनके लिए जांच करना असंभव हो जाएगा। इस पर प्रमुख सचिव आवास ने एलडीए वीसी को फाइल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
किसके पास थी फाइल, यह भी नहीं बताया
संबंधित फाइल उपलब्ध न कराने के पीछे माना जा रहा है कि विजिलेंस जांच के बढ़ते दबाव को देखते हुए उसे ‘गायब’ कर दिया गया। पिछले साल जून में एलडीए के तत्कालीन संयुक्त सचिव डॉ. महेंद्र मिश्र की ओर से विजिलेंस विभाग को 23 पत्रावलियों के उपलब्ध न होने की दी गई। यह जानकारी भी फाइलों को गायब किए जाने की ओर इशारा कर रही है। एलडीए के अधिकारी यह भी बताने को तैयार नहीं हैं कि फाइल किस कर्मचारी के पास रखी गई थी।
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अब तक नहीं दी फाइलें
12 बार मांगने पर भी एलडीए ने अब तक फाइलें नहीं उपलब्ध कराई हैं। ऐसे में मामले की जांच करना मुश्किल हो जाएगा। इसलिए हमने शासन को संबंधित फाइलें उपलब्ध कराने के लिए पत्र लिखा है।
-हितेश अवस्थी, पुलिस महानिदेशक, विजिलेंस
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अब एलडीए को 39 भूखंडों की फाइलों की तलाश
अपर मुख्य सचिव गृह के निर्देश पर वीसी ने दो टीम बनाकर शुरू कराई पड़ताल
फोटो - मुक्तेश्वरनाथ ओझा, एलडीए से निष्कासित बाबू।
अतुल भारद्वाज
लखनऊ। एलडीए को प्रियदर्शिनी और जानकीपुरम योजना में करोड़ों के 39 भूखंडों की फाइलों की तलाश है। इनके आवंटन की फाइलें प्राधिकरण से गायब हैं तो मौके पर आवंटी भी नहीं मिल रहे हैं। शिकायत के बाद खुद अपर मुख्य सचिव गृह व सतर्कता विभाग निगरानी कर रहे हैं। वहीं, एलडीए वीसी ने दो टीमें बनाकर सभी भूखंडों की मौजूदा स्थिति की जांच शुरू कर दी है। रिकॉर्ड न मिलने पर अपर मुख्य सचिव गृह व सतर्कता अवनीश अवस्थी ने 20 अगस्त को बैठक ली। उन्होंने एलडीए वीसी प्रभु एन सिंह को जांच जल्द पूरा करने के लिए फाइल उपलब्ध कराने को कहा। इस पर उन्होंने एलडीए में फाइल की तलाश और न मिलने पर भौतिक सत्यापन का आदेश किया। वीसी ने भूखंडों की जांच को दो टीम बनाकर कार्रवाई के लिए कहा है।
संयुक्त सचिव ऋतु सुहास ने कार्रवाई के लिए जोन-4 के प्रभारी अभियंता अजय पंवार को जिम्मेदारी सौंपी है। 39 भूखंडों की संख्या और आवंटियों के दावेदारों के नाम की सूची भी सौंपी है। टीम का काम मौके पर भूखंड की स्थिति के अलावा दस्तावेज जैसे आवंटन पत्र, बिजली बिल की कॉपी, नगर निगम के गृहकर आदि रिकॉर्ड जुटाना होगा। अजय पंवार और संयुक्त सचिव जांच रिपोर्ट के साथ सीधे वीसी को रिपोर्ट करेंगे।
सहायक अभियंता, अवर अभियंता जांच में जुटे
वीसी के निर्देश पर सहायक अभियंता राजेश सिंह तोमर और सहायक अभियंता एलबी सिंह की निगरानी में टीमें बनी हैं। राजेश सिंह के साथ सुभाष शर्मा, सुशील वर्मा, जितेंद्र कुमार और एलबी सिंह के साथ उदयवीर सिंह, राकेश कुमार, जितेंद्र कुमार को रखा गया है। इसी तरह जानकीपुरम में भी भूखंडों की जांच कराने के लिए जोन-5 के अधिशाषी अभियंता को वीसी ने कहा है। प्रियदर्शिनी योजना में सबसे अधिक 31 और जानकीपुरम योजना में आठ भूखंड की जांच होनी है।
आठ और भूखंड जांच के दायरे में आए
सतर्कता विभाग को मिली शिकायत में जानकीपुरम विस्तार योजना के ही आठ और भूखंड के रिकॉर्ड की जांच कराने के लिए कहा गया है। इनकी भूखंड संख्या भी सतर्क ता विभाग ने एलडीए से साझा की है। इनमें 4/808ए, 4/808बी, 4/808सी, 4/808डी, 4/812ए, 4/812बी, 4/812सी, 4/812डी शामिल हैं। इनके आवंटन 2006, 2007 में अनियमित रूप से किए जाने की बात कही गई है।
इन भूखंडों की वीसी ने शुरू कराई जांच
जानकीपुरम योजना- 4/804 (ऊषा सिंह), 4/805 (मीनू सिंह), 4/806 (लक्ष्मी दत्त जोशी), 4/784 (अजीम खां), 4/786 (निर्मल कुमार श्रीवास्तव), 4/803 (रेनू पाठक), 4/783 (शबनम यासमीन), 4/782 (निर्मला देवी)। सभी भूखंड सेक्टर एच के हैं।
प्रियदर्शिनी योजना- 3/342डी (संदीप कुमार), 3/113 (पुष्पा सिंह), 3/74सी (अभिषेक सिंह), 3/74डी (उर्मिला), 3/66सी (रामप्रकाश), 3/312जी (संतोष कुमार), 3/125 (मीना), 3/172 (रेशमा फातिमा), 3/66डी (अज्ञात), 3/212ई (रवि कुमार), 3/212डी (लक्ष्मी सिंह), 3/212ए (परवेज कुमार श्रीवास्तव), 3/212बी (अंकिता), 3/212सी (अंशुल गुप्ता), 3/212एफ (नितिन कुमार), 3/212जी(सुनील शुक्ला), 3/212एच (पूजा), 3/24बी (पुष्पा), 3/24सी (उर्मिला), 3/24डी (रेनू), 3/233 (भारत भूषण गुप्ता), 3/233ए (अनुराधा गोयल), 3/1ए (जितेंद्र कुमार बाद में रेनू को आवंटित), 3/33बी (गोविंद कृष्ण अग्रवाल), 3/234 (संतोष कुमार), 3/233डी (सरोज गुप्ता), 3/1बी (प्रेमिका द्विवेदी), 3/1सी (चंद्रा त्रिपाठी), 3/1डी (गायत्री), 3/233ई (कृष्णा अवस्थी), 3/233डी (आरती)।
(आवंटियों के नाम सतर्कता विभाग से एलडीए को भेजी गई सूची के आधार पर हैं। अधिकतर आवंटन मुक्तेश्वर नाथ ओझा ने किए हैं। वहीं, कई भूखंड खुद ओझा के परिवारीजनों के नाम पर हैं।)
तलाशी जा रही हैं फाइलें
47 भूखंडों के बारे में सतर्कता विभाग ने सूचना मांगी थी। आठ की फाइलें मिल चुकी हैं। बाकी 39 भूखंडों की फ ाइलें और अन्य दस्तावेज, भौतिक स्थिति की जानकारी के साथ जुटाए जा रहे हैं। पूरी सूचना सतर्कता विभाग के साथ साझा होगी। पूर्व में ही निष्कासित किए जा चुके बाबू मुक्तेश्वर नाथ ओझा के लिंक को भी खंगाला जा रहा है।
- प्रभु एन सिंह, वीसी, एलडीए