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अखिलेश सरकार के कारण ठगे जा रहे जाट

Sun, 04 May 2014 01:22 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,लखनऊ
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केंद्र सरकार से आरक्षण मिलने के बाद भी जाट समुदाय प्रदेश सरकार की बेरूखी से अब भी ठगा जा रहा है।
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जाट जाति को केंद्रीय सेवाओं की अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी में आरक्षण तो मिल गया लेकिन दो महीने बाद भी प्रदेश में इसके आधार पर जाति प्रमाण पत्र जारी करना शुरू नहीं किया गया।

नतीजतन जाट परिवारों के युवा केंद्रीय सेवा की नौकरियों के अलावा विश्वविद्यालयों की प्रवेश परीक्षा व यूजीसी नेट के लिए कोटा के तहत आवेदन नहीं कर पा रहे हैं।
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मामला शासन में पहुंच गया है। प्रदेश सरकार ने लोकसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होने के पहले चार मार्च को जाट जाति को केंद्रीय सेवाओं की ओबीसी श्रेणी में शामिल करने का फैसला किया था।

आवेदन तिथि समाप्त

इस संबंध में राजपत्र भी जारी कर दिया गया था। राष्ट्रीय लोकदल के डॉ. राजकुमार सांगवान बताते हैं कि इसके बावजूद तहसीलों से केंद्रीय सेवाओं में ओबीसी श्रेणी में शामिल होने के लिए प्रमाण पत्र जारी नहीं किए जा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि नौ अप्रैल को सर्वोच्च न्यायालय ने भी इस राजपत्र पर मुहर लगा दी। यूजीसी ने इसी आधार पर जाट जाति को ओबीसी में शामिल कर समस्त विश्वविद्यालयों को निर्देश भी जारी कर दिए।

सांगवान ने बताया कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों की प्रवेश परीक्षा और यूजीसी नेट के लिए आवेदन की अंतिम तिथि समाप्त होने वाली है, पर तहसीलों के रवैये के कारण प्रमाण पत्र जारी नहीं हो रहे हैं।
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चुनाव के बाद निर्णय

सांगवान का कहना है ‌कि ऐसे में युवाओं को इस फैसले के लाभ से वंचित होना पड़ रहा है।

सांगवान की शिकायत का मेरठ के  कमिश्नर मनजीत सिंह ने संज्ञान लिया है। उन्होंने शासनसे इस संबंध में मार्गदर्शन मांगा है।

इस संबंध में पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के मंत्री अंबिका चौधरी ने कहा है कि अभी हम बलिया में चुनाव में व्यस्त हैं। 12 को मतदान होना है।

इसके  बाद लखनऊ आएंगे तो पता करेंगे कि कहां क्या अड़चन है। इसे दूर कराया जाएगा।
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