फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सोशल ऑडिट की रिपोर्ट के बाद भी नहीं हो रही वसूली, ग्राम पंचायत सचिव के वेतन से होगी भरपाई

Mon, 24 Aug 2020 10:45 AM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर
विज्ञापन
मनरेगा योजना में सोशल ऑडिट की रिपोर्ट के बाद भी कुछ जिलों में संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से दुरुपयोग की गई राशि की वसूली नहीं हो रही है। ग्राम्य विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने बीते दो वित्तीय वर्षों में अटकी हुई वसूली करने के निर्देश दिए हैं।
विज्ञापन


वित्तीय वर्ष 2018-19 में 35 जिलों में मनरेगा की सोशल ऑडिट की गई थी। 24 जिलों में एक करोड़ 37 लाख रुपये की वसूली की संस्तुति की गई थी। जिलों के अधिकारियों ने वसूली पूरी तरह नहीं की। अधिकांश जिलों में 50 प्रतिशत वसूली हुई, लेकिन लखीमपुर खीरी, ललितपुर, मुरादाबाद, रामपुर, श्रावस्ती और शामली में वसूली 1.45 प्रतिशत ही राशि वसूल की गई।   

इसी प्रकार 2019-20 में 35 जिलों की सोशल ऑडिट में 33 जिलों में 9 करोड़ 2 लाख 4 हजार रुपये की वसूली की संस्तुति की गई थी। अब तक 50 प्रतिशत राशि की भी वसूल नहीं की गई है। लेकिन शामली, श्रावस्ती और उन्नाव में .10 प्रतिशत भी वसूली नहीं की गई। 
विज्ञापन
विज्ञापन

उपायुक्त मनरेगा करेंगे समीक्षा

मनरेगा के नियमानुसार वसूली की जिम्मेदारी कार्यक्रम अधिकारी की है। सरकार ने माना है कि इन जिलों में कार्यक्रम अधिकारी ने वसूली करने में लापरवाही की है।  सरकार ने संबंधित जिलों के उपायुक्त मनरेगा को विकासखंड वार इसकी समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं।

सरकार ने ग्राम पंचायत सचिव से वसूली के लिए उन्हें नोटिस जारी करने, नोटिस के बाद भी राशि जमा नहीं कराने पर उनके वेतन से हर माह 50 प्रतिशत की कटौती करने के निर्देश दिए हैं। इसके अतिरिक्त ग्राम रोजगार सेवक, ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सचिव, तकनीकी सहायक, लेखाकार, कार्यक्रम अधिकारी और प्रोग्राम ऑफिसर की जिम्मेदारी तय करते हुए वसूली की कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें