मनरेगा योजना में सोशल ऑडिट की रिपोर्ट के बाद भी कुछ जिलों में संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से दुरुपयोग की गई राशि की वसूली नहीं हो रही है। ग्राम्य विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने बीते दो वित्तीय वर्षों में अटकी हुई वसूली करने के निर्देश दिए हैं।
वित्तीय वर्ष 2018-19 में 35 जिलों में मनरेगा की सोशल ऑडिट की गई थी। 24 जिलों में एक करोड़ 37 लाख रुपये की वसूली की संस्तुति की गई थी। जिलों के अधिकारियों ने वसूली पूरी तरह नहीं की। अधिकांश जिलों में 50 प्रतिशत वसूली हुई, लेकिन लखीमपुर खीरी, ललितपुर, मुरादाबाद, रामपुर, श्रावस्ती और शामली में वसूली 1.45 प्रतिशत ही राशि वसूल की गई।
इसी प्रकार 2019-20 में 35 जिलों की सोशल ऑडिट में 33 जिलों में 9 करोड़ 2 लाख 4 हजार रुपये की वसूली की संस्तुति की गई थी। अब तक 50 प्रतिशत राशि की भी वसूल नहीं की गई है। लेकिन शामली, श्रावस्ती और उन्नाव में .10 प्रतिशत भी वसूली नहीं की गई।