फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

लखनऊ में कोरोना के डर से नॉन कोविड निजी अस्पताल भी खाली

विज्ञापन
विज्ञापन
हिमांशु अवस्थी
विज्ञापन

कोरोना के डर और लॉकडाउन की वजह से निजी अस्पतालों में मरीज नहीं आ रहे हैं। इसके चलते राजधानी के करीब 80 फीसदी नॉन कोविड निजी अस्पतालों में दो हफ्तों से सन्नाटा है।
निजी अस्पताल के प्रभारियों का कहना है कि कोविड व लॉकडाउन का सबसे बुरा असर निजी अस्पतालों पर पड़ा है। बडे़ अस्पतालों को छोड़ दें तो सभी अस्पताल खाली पडे़ हैं।
विज्ञापन

ऐसे में डॉक्टर व स्टाफ का वेतन देने में दिक्कतें आ रही हैं। डॉक्टरों का यह भी कहना है कि खानपान सुधारने और अनुशासित होने से लोग कम बीमार पड़ रहे हैं।
शहर में 1300 से अधिक निजी अस्पताल हैं। कोविड से पहले यहां हर रोज छोटे-बडे़ मिलाकर 400-500 ऑपरेशन होते थे और ओपीडी में आठ से दस हजार मरीज आते थे।
कोरोना के चलते रूटीन सर्जरी व ओपीडी पहले से बंद है। गैर जनपद से हर रोज पहले करीब 70 से 80 मरीज आते थे। ये सभी अपने जिले में इलाज करवा रहे हैं। अति गंभीर मरीज ही आ रहे हैं। इसके अलावा मरीजों ने सर्जरी भी टाल रखी है।
दूसरी संक्रामक बीमारियां हुईं छूमंतर
सिविल अस्पताल के निदेशक डॉ. सुभाष का कहना है कि आज शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा, जो बिना हाथ धोए खाना खाता होगा। एक सर्वे के मुताबिक, कोरोना से पहले करीब 30 प्रतिशत लोग ही खाने से पहले अच्छे से हाथ धोते थे। पर अब लगभग सभी लोग खाने से पहले हाथ जरूर धोते हैं। इससे संक्रामक बीमारियों से बचाव हो जाता है।
पेट से संबंधित अन्य परेशानी
डॉ. सुभाष ने बताया कि गंदे हाथ से खाना खाने से पेट से संबंधित अन्य परेशानी होती हैं। हाथ में मौजूद बैक्टीरिया और वायरस पेट को संक्रमित करते हैं। इससे पेट में दर्द सहित कई अन्य दिक्कतें हो सकती हैं। इन मरीजों का ग्राफ बेहद कम हुआ है। इक्का-दुक्का मरीज ही सरकारी अस्पताल में भर्ती हो रहे हैं।
अन्य संक्रामक रोग के मरीज बेहद कम
सिविल अस्पताल के निदेशक डॉ. सुभाष ने बताया कि इमरजेंसी में डायरियां व अन्य संक्रामक रोग के मरीज बेहद कम है। इक्का-दुक्का ही मामले सामने आ रहे हैं। सड़क हादसा, बर्न व अन्य क्रॉनिक बीमारी के मरीज ही अस्पताल में भर्ती हो रहे हैं।
विज्ञापन

छोटे-मंझोले अस्पतालों में बीते दो हफ्ते से मरीज नहीं आ रहे
आईएमए अध्यक्ष, लखनऊ शाखा, डॉ. रमा श्रीवास्तव ने बताया कि कोविड के दौरान निजी अस्पतालों में मरीजों की तादाद बेहद कम हुई है। छोटे-मंझोले अस्पतालों में बीते दो हफ्ते से मरीज नहीं आ रहे हैं। किसी अस्पताल में एक या दो ही मरीज अभी भर्ती है। जहां पहले 30 से 40 मरीज भर्ती रहते थे। कोविड का डर व लॉकडाउन की वजह से भी मरीजों ने सर्जरी टाल रखी है। सभी निजी अस्पताल प्रोटोकॉ का पालन कर रहे हैं। स्क्रीनिंग और जांच के बाद ही मरीजों को भर्ती किया जाएगा।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें