उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरियों में किसी भी कार्मिक को निशक्तता के आधार पर पदोन्नति से मना नहीं किया जा सकता है। पदोन्नति में दिव्यांग कर्मचारियों का आरक्षण 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 4 प्रतिशत किए जाने के संबंध में शासन ने विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अपर मुख्य सचिव, कार्मिक डॉ. देवेश चतुर्वेदी की ओर से इसका शासनादेश जारी किया गया है।
शासनादेश के अनुसार, अगर कोई कर्मचारी सेवा में रहते हुए दिव्यांग होता है तो न तो उसे सेवा से निकाला जाएगा और न ही उसकी रैंक में कोई अवनति की जाएगी। अगर कार्मिक दिव्यांगता के कारण दायित्व का निर्वहन नहीं कर पाता है तो समान वेतनमान और सेवाओं के किसी अन्य पद पर उसे शिफ्ट किया जाएगा।
किसी अन्य पद पर समायोजन की स्थिति न होने पर उसे एक अधिसंख्य पद पर तब तक रखा जाएगा, जब तक उसके लिए उपयुक्त पद उपलब्ध न हो जाए या वह सेवानिवृत्त न हो जाए। अगर इस तरह का दिव्यांग कार्मिक उच्च वेतनमान में पदोन्नति के लिए अर्ह हो जाए और किसी अन्य पद के सापेक्ष समायोजित किया जाना संभव न हो तो उसके लिए अगले स्तर का अधिसंख्य पद सृजित किया जाएगा। साथ ही जिस पूर्व स्तर के अधिसंख्य पद पर वह तैनात है, उसे समर्पित किया जाएगा।
कोई कार्मिक सेवा में आने के बाद दिव्यांग होता है तो वह इस आरक्षण का लाभ पाने का हकदार होगा। बशर्ते दिव्यांगता का स्तर 40 प्रतिशत या उससे अधिक हो। समूह घ से ग, समूह ग से ख और समूह ख से क की पदोन्नतियों में 4 प्रतिशत रिक्तयां दिव्यांग कार्मिकों के लिए आरक्षित होंगी। दिव्यांग कर्मी को सिर्फ इस आधार पर कि कोई रिक्ति उसकी श्रेणी के लिए चिह्नित नहीं है, पदोन्नति से मना नहीं किया जा सकता है।