फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गोहत्या के आरोपियों पर नहीं लगेगा गैंगस्टर एक्ट

Fri, 18 Dec 2015 02:43 AM IST
मनोज कुमार सिंह/अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
विज्ञापन
हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने एक अहम फैसले में कहा है कि गत एक अप्रैल को संबंधित अध्यादेश प्रभावहीन होने से पुलिस अफसर गोवध निवारण कानून के तहत आरोपियों पर गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई नहीं कर सकते।
विज्ञापन


अदालत ने साफ कहा कि गत एक अप्रैल के बाद पुलिस अफसरों को ऐसा कानूनी क्षेत्राधिकार नहीं था। कोर्ट ने इस विधि व्यवस्था के साथ अमेठी के जामो थाना क्षेत्र से संबंधित गैंगस्टर एक्ट मामले की पूरी आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी।

न्यायमूर्ति अजय लांबा और न्यायमूर्ति अख्तर हुसैन खां की खंडपीठ ने यह फैसला जुनैद अहमद की रिट मंजूर करते हुए सुनाया। याची का कहना था कि वह गोवध निवारण कानून के तहत मामले में आरोपी था। इसी नाते उसके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट में भी कार्रवाई करते हुए गत 11 जून को यूपी गिरोह बंद निवारण कानून के तहत यह मुकदमा दर्ज कराया गया।
विज्ञापन


याची की तरफ से दलील दी गई कि चूंकि इसी साल संबंधित अध्यादेश, जिसमें गोवध निवारण कानून समेत कुल 10 अपराधों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई का प्रावधान था, गत एक अप्रैल को प्रभावहीन हो गया। लिहाजा इस तारीख के बाद उसके खिलाफ दर्ज कराया गया मुकदमा रद्द करने लायक है।
विज्ञापन

इस तरह रद्द कर दी गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई

उधर, राज्य सरकार की तरफ से अधिवक्ता रिशाद मुर्तजा ने मामले में प्रमुख सचिव गृह देवाशीष पंडा का जवाबी हलफनामा दाखिल कर कहा कि 11 दिसंबर 2015 को सरकार ने उक्त अध्यादेश के तहत कोई भी प्राथमिकी दर्ज नहीं करने का निर्णय किया है।

इस अध्यादेश में गोवध निवारण कानून समेत 9 अन्य तरह के अपराधों में गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई करने का प्रावधान था, जो अब एक अप्रैल 2015 के बाद खत्म हो चुका है। मुर्तजा ने कोर्ट को यह भी बताया कि  इस निर्णय के अनुसार कार्रवाई के लिए अफसरों को सूचित किया जा चुका है।

अदालत ने फैसले में कहा कि याची के खिलाफ एक अप्रैल के बाद 11 जून 2015 को गैंगस्टर एक्ट में कार्रवाई की गई क्योंकि वह गोवध निवारण कानून में आरोपी था।

चूंकि  एक अप्रैल 2015 के बाद वह अध्यादेश प्रभावी नहीं था, लिहाजा पुलिस अफसरों द्वारा गैंगस्टर एक्ट के तहत केस दर्ज करना साफ तौर पर उनके क्षेत्राधिकार से परे था। कोर्ट ने इस टिप्पणी के साथ याची के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट की कार्यवाही रद्द कर दी।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें