लोगों को उम्मीद थी कि अयोध्या से महज 100 किलोमीटर की दूरी पर हो रही अपनी रैली में मोदी मंदिर मुद्दे पर जरूर चुप्पी तोड़ेंगे।
पर, यहां भी उन्होंने चतुराई से इस मुद्दे को छुए बगैर आगे निकलने का रास्ता तलाश लिया।
उन्होंने कहा, ‘राम-कृष्ण की इस पवित्र भूमि से वह हिंदुस्तान बनाने का आशीर्वाद मांगने आए हैं। इस भूमि ने ही देश को गरिमा दिलाई है। इस बार भी यहां की धरती को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।’
बहराइच में एक खास बात और दिखी। मंच पर लगी एक तस्वीर में मोदी को अटल बिहारी वाजपेयी के बाजू में तो दिखाया गया था।
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पर, मोदी के भाषण में अटल के नाम का जिक्र तक नहीं था। लालकृष्ण आडवाणी के नाम की भी चर्चा तक नहीं सुनाई दी।
मोदी जब मंच पर पहुंचे तो यूपी के भगवा चेहरों में शुमार योगी आदित्यनाथ बोल रहे थे।
उन्होंने अपने नारों से कुछ उसी तरह का माहौल बनाने की कोशिश की जैसा राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान दिख रहा था।
उन्होंने जयश्री राम के नारे भी लगवाए। कुछ अन्य नेताओं ने भी रैली को भगवा तेवर देने की कोशिश की। पर, मोदी बोले तो उन्होंने मंदिर मुद्दे का कोई जिक्र नहीं किया। इससे यह साफ हो गया कि वह विवादित मुद्दों को फिलहाल छूने वाले नहीं।
मोदी ने बहराइच से पहले जो यूपी में दो और रैलियां की हैं। उनमें उन्होंने अटल के नाम व काम का बार-बार उल्लेख किया।
पर, यहां उनके भाषणों में इनका उल्लेख नहीं सुनाई दिया। हालांकि राजनाथ सिंह ने अटल के काम की चर्चा जरूर की। लेकिन आडवाणी का किसी भी नेता ने नाम नहीं लिया।
रैली के बाद कई लोगों के मुंह से यह बात सुनाई दी कि बदलते जमाने की भाजपा को शायद अब इन सबकी जरूरत नहीं।
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