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Lucknow News : सात साल तक की सजा में सीधे गिरफ्तारी नहीं, दहेज प्रताड़ना के केस में अहम फैसला

Mon, 21 Nov 2022 12:04 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

हाईकोर्ट ने कहा कि इस धारा के तहत पुलिस अधिकारी को आरोपी को पहले से बताए हुए स्थान व समय पर पेश होने का नोटिस जारी करना आवश्यक है। अगर आरोपी नोटिस की शर्तों का पालन करता है तो उसे तब तक गिरफ्तार नहीं किया जाएगा, जब तक पुलिस अफसर दर्ज कारणों पर गिरफ्तारी को जरूरी ठहराता है।
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लखनऊ हाईकोर्ट
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विस्तार
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हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने दहेज प्रताड़ना के मामले में अहम फैसला देते हुए कहा कि सात साल तक सजा वाले केस में आरोपी को सीधे गिरफ्तार नहीं किया जा सकता। हालांकि, गिरफ्तारी जरूरी होने पर कारण दर्ज करते हुए ऐसे मामलों में आरोपी की गिरफ्तारी हो सकती है।

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न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह की खंडपीठ ने यह फैसला मुकेश यादव व अन्य आरोपियों की याचिका पर सुनाया। याचियों के खिलाफ स्थानीय गोसाईंगंज थाने में दहेज प्रताड़ना व मारपीट का मुकदमा दर्ज है। याचियाें ने केस में गिरफ्तारी पर रोक लगाने की गुजारिश की थी। उनका कहना है कि इस अपराध के लिए अधिकतम सात साल की सजा है। ऐसे में उनकी सीधे गिरफ्तारी न करके विवेचना अधिकारी को सीआरपीसी की धारा 41(1) में वर्णित प्रक्रिया का पालन करने का निर्देश दिया जाए।

इस धारा के तहत पुलिस अधिकारी को आरोपी को पहले से बताए हुए स्थान व समय पर पेश होने का नोटिस जारी करना आवश्यक है। अगर आरोपी नोटिस की शर्तों का पालन करता है तो उसे तब तक गिरफ्तार नहीं किया जाएगा, जब तक पुलिस अफसर दर्ज कारणों पर गिरफ्तारी को जरूरी ठहराता है। इसके मद्देनजर कोर्ट ने विवेचना अधिकारी को निर्देश दिया कि सीआरपीसी की धारा 41-ए के प्रावधानों का अनुपालन करने के बाद ही गिरफ्तारी आदि की कार्रवाई की जाए। 

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