केजीएमयू में एमबीबीएस की बढ़ी हुई सीटों पर काउंसलिंग को लेकर असमंजस बना हुआ है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के 24 घंटे बाद भी काउंसलिंग की तिथि घोषित नहीं की गई।
केजीएमयू और चिकित्सा शिक्षा विभाग दोनों ही शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के इंटरनेट पर डाउनलोड होने का इंतजार करते रहे।
लेकिन फैसले की प्रति हाथ में न आने के कारण कांउसलिंग की तिथि घोषित नहीं हो पायी। केजीएमयू में एमबीबीएस की बढ़ी हुई सीटों पर 30 सितंबर तक प्रवेश प्रक्रिया पूरी की जानी है।
25 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के 24 घंटे बीत गए लेकिन काउंसलिंग के लिए फैसला नहीं हो पाया।
जबकि प्रवेश प्रक्रिया पूरी करने के लिए सिर्फ चार दिन रह गए हैं। काउंसलिंग से जुड़े लोगों की मानें तो केजीएमयू में प्रवेश लेना अभ्यर्थियों का सपना होता है।
65 सीटों पर प्रवेश के लिए अब कानपुर, झांसी, मेरठ, आगरा, गोरखपुर मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश ले चुके अभ्यर्थी भी प्रयास करेंगे।
इनको अपने-अपने मेडिकल कॉलेज से कांउसलिंग में शामिल होने के लिए एनओसी लेना होता है।
इसके बाद ये सभी काउंसलिंग में शामिल होंगे। जिन कॉलेजों की सीटें खाली होंगी। वहां बीडीएस या अन्य अभ्यर्थी प्रवेश लेना चाहेंगे। इस पूरी प्रक्रिया में जितनी देरी होती जाएगी। प्रवेश में दिक्कतें आएंगी।
कुलपति प्रो. रविकांत का कहना है कि सीटें बढ़ाने का फैसला केजीएमयू के हक में है।
काउंसलिंग की जिम्मेदारी चिकित्सा शिक्षा महानिदेशालय की है।सभी लोग सुप्रीम कोर्ट का फैसला डाउलोड होने का इंतजार कर रहे हैं।
वहीं प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा बी.एस.भुल्लर भी फैसला न मिलने तक काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू करने की तिथि को लेकर संशय में थे।