इस समय 35 से अधिक ट्रेनें टैक्स चोरी का माल ढो रही हैं। इनमें शताब्दी
और लखनऊ मेल सहित कई वीआईपी ट्रेनें शामिल हैं।
रोजाना करीब पांच करोड़ कीमत के रेडीमेड, इलेक्ट्रॉनिक्स,
सुपारी, चायनीज मोबाइल बिना टैक्स चुकाए ही स्टेशन से सीधे कारोबारियों के
गोदाम एवं दुकान तक पहुंच जाते हैं। टैक्स चोरी के इस माल को स्टेशन से
बाजार तक पहुंचाने के दौरान कोई नहीं पकड़ता।
राजधानी
में टैक्स चोरी का यह खेल कुछ वाणिज्य कर अफसर, पुलिस व रेल कर्मचारी खेल
रहे हैं। वाणिज्य कर अफसरों, रेल कर्मियों, आरपीएफ और जीआरपी के
जवान माल के नग के हिसाब से ‘हफ्ता’ वसूली करके आसानी से जाने देते हैं।
नई दिल्ली से आने वाली शताब्दी एक्सप्रेस से ही टैक्स चोरी के रोजाना
100-150 माल नग उतारे जा रहे हैं। दोपहर एक बजे के करीब टैक्स चोरी के ये
पार्सल भी लखनऊ जंक्शन के सामने से निकलकर सीधे दुकानदारों तक पहुंच रहे
हैं।
कुछ ऐसा है होता नजारा
जो सामान आता है उसे सीधे टैम्पो में लादकर बाजारों में भेज दिया जाता है। चारबाग
स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक पर लखनऊ मेल पहुंचती है। इस ट्रेन के रुकते
ही 10-12 लोग इंजन के पास वाले एसएलआर में लदी सामान की पेटियां उतारकर
तुरंत पार्सल घर पहुंचा देते हैं।
मौके पर तैनात आरपीएफ और जीआरपी जवानों
का इशारा मिलते ही पेटियों को यहां पहले से खड़े टैम्पो डाला में लादकर रेल
आरक्षण चारबाग केंद्र के रास्ते बाहर भेज दिया जाता है।
लखनऊ
मेल के 35 मिनट बाद इसी प्लेटफार्म पर नई दिल्ली से दूसरी ट्रेन (12272)
दुरंतो एक्सप्रेस भी आ गई। उसके एसएलआर कोच से भी होजरी, रेडीमेड कपड़े,
मोबाइल फोन और इलेक्ट्रानिक उपकरण के करीब 40 नग उतारकर उन्हें भी बिना
किसी देरी के पार्सल घर पहुंचा दिया गया।
वाणिज्य कर विभाग की साठगांठपहले
चारबाग स्टेशन पर वाणिज्य कर विभाग की चेक पोस्ट थी। इसे हटाने के बाद सचल
दस्ते बनाए गए। ऊपरी कमाई के लिए वाणिज्य कर के कुछ कर्मचारी चारबाग
स्टेशन पर पार्किंग स्टैंड के सामने कुर्सी डालकर बैठते थे।
विभाग में
शिकायत पहुंचने के बाद यहां से कर्मचारी भाग निकले। अब बड़े पैमाने पर हो
रही टैक्स चोरी के बावजूद वाणिज्य कर विभाग कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।
सूत्रों के अनुसार इसके बदले में तय रकम पहुंच जाती है।
रिश्तेदारों के हवाले कर दिया कोचसंरक्षा
मानकों का दावा करने वाला रेलवे खुद भी इस गोरखधंधे में शामिल है। चार टन
से अधिक भार का माल एसएलआर कोच में लादकर नई दिल्ली से लखनऊ भेजा जा रहा
है। यह संरक्षा मानकों के खिलाफ है।
दरअसल रेलवे बोर्ड के कई अफसरों ने अपने रिश्तेदारों को मुख्य ट्रेनों
की एसएलआर बोगी की लीज का लाइसेंस दिलवा दिया है। इस कारण मानक से अधिक माल
ढुलाई का मामला पकड़े जाने पर अधिकारियों के आदेश आते ही लीज धारकों के
खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती है।