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म्यूनिसिपल बॉन्ड से 50 करोड़ खर्च का नहीं कराया ऑडिट

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मुख्य लेखा परीक्षक ने मुख्य अभियंता को दिया नोटिस। (फोटो ः प्रतीकात्मक) - फोटो : ??? ?????
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प्रवेंद्र गुप्ता
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नगर निगम के म्यूनिसिपल बॉन्ड से जुड़ा एक और मामला सामने आया है। इसमें पांच महीने में 50 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किए जाने के बाद भी ऑडिट न कराए जाने पर सवाल उठे हैं।
इसे लेकर मुख्य नगर लेखा परीक्षक ने मुख्य अभियंता को नोटिस भी जारी किया है। गड़बड़ी छिपाने के लिए हमेशा ऑडिट से भागने वाला नगर निगम का अभियंत्रण विभाग अब म्यूनिसिपल बॉन्ड से जुटाए 200 करोड़ रुपये के बजट से हो रहे खर्च का भी हिसाब देने में आनाकानी कर रहा है।
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इस साल मई से सितंबर तक बॉन्ड से जुटाई रकम से 50 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है। यह कितना सही है, इसकी जांच के लिए फाइलें अब तक नगर निगम के ही ऑडिट विभाग को नहीं दी गई हैं।
इसे लेकर मुख्य लेखा परीक्षक बनवारी लाल की ओर से मुख्य अभियंता महेश वर्मा को सख्त नोटिस जारी किया गया है, जिसमें वित्तीय नियमों की अवहेलना का आरोप लगाया गया है।
ऐसे में म्यूनिसिपल बॉन्ड जारी कर निवेशकों से जुटाई रकम के खर्च में ऑडिट को लेकर यह लापरवाही बॉन्ड को लेकर निवेशकों के सामने बनाई साख पर असर डाल सकती है।
कार्यकारिणी में पेश होनी है रिपोर्ट
आमदनी और खर्च पर निगरानी के लिए नगर निगम में लेखा परीक्षा विभाग है। इसमें शासन की ओर से मुख्य नगर लेखा परीक्षक की तैनाती की जाती है, जिसके अधीन एक दर्जन से अधिक लेखा परीक्षक रहते हैं। लेखा परीक्षा विभाग सीधे महापौर और नगर निगम कार्यकारिणी को रिपोर्ट करता है। उसे ही अपनी रिपोर्ट भेजता है। बॉन्ड की रकम से हुआ भुगतान नियमों के तहत है या नहीं, इसकी रिपोर्ट भी कार्यकारिणी में जानी है। यह रिपोर्ट हर महीने बनती है, लेकिन पांच महीने से मुख्य अभियंता सिविल ने बॉन्ड के बजट से हुए भुगतान की फाइलें ही जांच को नहीं दीं।
नगर निगम को नुकसान की आशंका
मुख्य नगर लेखा परीक्षक बनवारी लाल ने मुख्य अभियंता महेश वर्मा को भेजे नोटिस में कहा कि पांच महीने से सत्यापन के लिए अभिलेख नहीं दिए गए। यह स्थिति न केवल लेखा नियमावली, बल्कि नगर निगम अधिनियम का भी उल्लंघन है। इससे नगर निगम को आर्थिक क्षति हो सकती है।
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किस महीने, कितना भुगतान
मई - 5,67,9,1,304 रुपये
जून- 5,90,000 रुपये
जुलाई- 20,84,24,352 रुपये
अगस्त- 8,83,79,277 रुपये
सितंबर- 15,17,03,707 रुपये
फाइल न मिलने से यह नहीं पता चल पाता कि किया गया भुगतान सही है यानहीं। लेखा बाउचर से सिर्फ यही पता चल पाता है कि कितना भुगतान हुआ। जब तक फाइल नहीं मिलेगी किए गए भुगतान की सच्चाई नहीं पता चलेगी। ऑडिट के लिए विभाग को नियमित फाइल भेजनी चाहिए। जब ऐसा नहीं हुआ तो पत्र भेजा गया है।
- बनवारी लाल, मुख्य नगर लेखा परीक्षक
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