लखनऊ। केजीएमयू में विशेष कार्याधिकारी (ओएसडी) की नियुक्ति में नियमों की धज्जियां उड़ा दी गईं। तत्कालीन अधीक्षक ने महज एक पत्र पर सैयद अब्बास की ओएसडी पद पर नियुक्ति का आदेश जारी कर दिया। हंगामा होने के बाद शासन के निर्देश पर एसटीएफ की जांच में इस फर्जीवाड़े की पोल खुल गई। एसटीएफ ने जांच रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। अब वित्त समेत संबंधित विभाग इस मामले में कार्रवाई करेगा।
शासन ने केजीएमयू में डॉ. रमीज मलिक द्वारा अवैध तरीके से धर्मांतरण कराने के आरोपों की जांच एसटीएफ को सौंपी थी। इसी दौरान केजीएमयू के ओएसडी सैयद अब्बास की इसमें संलिप्तता और नियुक्ति को लेकर बवाल मचने पर एसटीएफ को इसकी भी जांच करने को कहा गया। एसटीएफ की जांच में सैयद अब्बास की अवैध धर्मांतरण प्रकरण में संलिप्तता के सुराग तो नहीं मिले, लेकिन उनकी नियम विरुद्ध नियुक्ति की पोल खुल गई।
जांच से जुड़े एसटीएफ के एक अधिकारी के मुताबिक, दस्तावेजों की जांच में पता चला कि ओएसडी सैयद अब्बास की नियुक्ति महज एक अनुरोध पत्र देने पर हुई थी। इसी पत्र पर नियुक्ति का आदेश जारी कर दिया गया। बाद में उनका विनियमितीकरण भी हो गया, जबकि नियमों के मुताबिक नियुक्ति केजीएमयू प्रबंधन को करनी थी। इसके लिए अखबारों में विज्ञापन प्रकाशित कराकर आवेदन आमंत्रित करने के बाद अर्ह उम्मीदवारों का इंटरव्यू होना था।
विशेष सचिव की अध्यक्षता में बनी थी जांच समिति
राज्य सरकार ने केजीएमयू में अवैध धर्मांतरण सहित विभिन्न आरोपों की जांच बीती 12 जनवरी 2026 को एसटीएफ को सौंपी थी। इसके दायरे में सैयद अब्बास भी शामिल थे। इसी दौरान उनको सेवानिवृत्ति से जुड़े लाभ देने का मामला उजागर हुआ, जिसकी जांच के लिए चिकित्सा शिक्षा विभाग की विशेष सचिव कृतिका शर्मा की अध्यक्षता में दो सदस्यीय समिति बनाई गई। साथ ही 27 फरवरी को एसटीएफ को इस मामले की जांच भी करने को कहा गया।
ये आरोप लगे थे
- ओएसडी के सेवा अभिलेखों में कूटरचना करना
- तदर्थ कर्मी होने के बावजूद नियमित की तरह प्रोन्नति आदि सेवा लाभ देना
- केजीएमयू में एक विशेष विचारधारा को बढ़ावा देना
- पद के दुरुपयोग और कुछ व्यक्तियों को संरक्षण देना