पशुधन विभाग के नाम पर ठगी के मामले में बड़े लोगों का नाम आते ही जांच की रफ्तार सुस्त हो गई है। जिन लोगों की भूमिका पर एसटीएफ ने सवाल उठाया था और कार्रवाई की संस्तुति की थी, उसमें से किसी बड़े का अब तक नंबर नहीं आया है। एसटीएफ ने पूरे मामले के खुलासे के बाद आगे की कार्रवाई के लिए एसीपी गोमतीनगर को जांच सौंप दी थी।
सूत्रों का कहना है कि जांच के दौरान आईएएस और आईपीएस अधिकारियों का नाम सामने आते ही पुलिस की कार्रवाई सुस्त हो गई। हाल के दिनों में यह पहला मौका है जब ठगी के मामले में किसी आईपीएस की भूमिका सामने आई हो। एफआईआर में जिस इंस्पेक्टर की भूमिका बताई गई थी, उसे पुलिस ने क्लीन चिट दे दी, लेकिन आईपीएस की भूमिका को लेकर अधिकारियों में संशय है कि इनके खिलाफ किस तरह की कार्रवाई की जाए।
वहीं सूत्रों का कहना है कि जांच के दौरान जिन पुलिस अधिकारियों की भूमिका के बारे में जानकारी मिली थी, उन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए एसटीएफ ने शासन को चिठ्ठी भेजी थी, उस पर भी अब तक कुछ नहीं हुआ। सूत्रों का दावा है कि इस केस में एक दो नहीं बल्कि आधा दर्जन से अधिक ऐसे अफसर शामिल हैं जो इन जालसाजों के संपर्क में किसी न किसी रूप में रहे हैं।
इसमें नोएडा में तैनात रहे अफसरों से लेकर लखनऊ और आजमगढ़ में तैनात रहे अफसर तक शामिल हैं। ऐसे में अंदेशा इस बात का भी है कि एक के खिलाफ कार्रवाई होते ही नोएडा प्रकरण की तरह और परतें न उधड़ने लगें और सरकार को फजीहत का सामना करना पड़े। यही वजह है कि पुलिस इस मामले में फूंक-फूंक कर कदम रख रही है।