जनता दल यू के अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रविवार को कहा कि अखिलेश जी घबराइए नहीं, यूपी में शराबबंदी लागू कीजिए। 16 हजार करोड़ के राजस्व के लिए जनता की गाढ़ी कमाई के 60 हजार करोड़ रुपये बर्बाद मत कीजिए।
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महिलाओं की मांग पर उन्होंने बिहार विधानसभा चुनाव से पहले शराबबंदी लागू करने का वादा किया था। मुख्यमंत्री पद संभालने के तुरंत बाद उन्होंने 26 नवंबर को मद्य निषेध दिवस पर एक अप्रैल 2016 से शराबबंदी लागू करने की घोषणा कर दी। वह रवीन्द्रालय में किसान मंच द्वारा आयोजित शराब, खनन और भूमाफिया के खिलाफ जन अभियान कार्यक्रम में बोल रहे थे।
नीतीश पूरी तरह समाज सुधारक की भूमिका में दिखे। उन्होंने शराबबंदी के पक्ष में तर्क दिए। कहा कि कोई भी राज्य अब इससे बच नहीं सकता। उन्होंने शराब के खिलाफ जबरदस्त अभियान चलाया। एक करोड़ से ज्यादा स्कूली बच्चों के जरिये उनके अभिभावकों से शराब न पीने के शपथ पत्र भरवाए।
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एक्साइज एक्ट में संशोधन कर अवैध शराब बनाने व बेचने वालों को मृत्युदंड और शराब पीकर उत्पात मचाने वालों को 10 साल तक की सजा का प्रावधान किया। महिलाओं से कहा गया कि कहीं चोरी-छिपे अवैध शराब की भट्ठी चलते देखें तो उसे तोड़ दें, सरकार उनके साथ है। भावी पीढ़ी की खुशहाली के लिए शराबबंदी जरूरी है।
लोहिया का नाम ही न लो, उनके काम भी करो
- फोटो : amar ujala
सपा पर निशाना साधते हुए नीतीश ने कहा, ‘हमारा मजाक उड़ाकर कितने दिन काम चलाओगे।’ लोहिया का नाम लेते हैं तो लोहिया के कुछ काम भी कीजिए। आमदनी की चिंता न करें, यूपी में शराबबंदी लागू कर दीजिए। इससे कोष को जितना घाटा होगा उससे ज्यादा लाभ आपको मिलेगा।
नीतीश बोले, तुलना करा लीजिए, जांच दल भेज दीजिए। शराबबंदी के बाद से बिहार के लोगों को खुशी मिल रही है। दुर्घटनाओं व अपराधों में कमी आई है। कुछ दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं सामने आई हैं, उनमें दोषियों को कड़ी सजा दिलाकर रहेंगे।
नुकसान नहीं फायदे का सौदा है शराबबंदी
नीतीश ने कहा, शराबबंदी नुकसान नहीं फायदे का सौदा है। यूपी में 16-18 हजार करोड़ रुपये राजस्व के लिए 60 हजार करोड़ से अधिक की शराब पिलाई जा रही है। शराब पीना बंद हो जाए तो जनता की गाढ़ी कमाई का यह 60 हजार करोड़ रुपया बाजार में लगेगा। अच्छे कामों में खर्च होगा।
उससे भी तो टैक्स बढ़ेगा, घरेलू हिंसा में कमी आएगी, गांवों में शांति रहेगी। शराब सामाजिक बुराई है, यह नैतिक व्यापार नहीं है। सुप्रीम कोर्ट भी कह चुका है कि शराब पीना और इसका व्यापार करना मौलिक अधिकार नहीं है।
भाजपा शासित राज्यों में शराब बंदी लागू करवाएं मोदी
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नीतीश ने प्रधानमंत्री मोदी से अपील की कि वे भाजपा शासित राज्यों में शराबबंदी लागू कराएं। कहा, गुजरात में स्थापना के समय से शराबबंदी लागू है।
मोदी ने मुख्यमंत्री रहते शराबबंदी समाप्त नहीं की। वह इसके पक्षधर हैं। उन्हें इसे भाजपा शासित राज्यों में लागू कराना चाहिए। इससे झगड़े खत्म हो जाएंगे।
पता है, कितनी ताकतवर है शराब लॉबी
उन्होंने कहा, उनके यहां आने पर शराब व्यवसाय से जुड़े कुछ लोगों ने काले झंडे दिखाने की बात कही थी। पता नहीं दिखाए या नहीं। बिहार में तो उन्होंने धरना दिया।
कहा कि शराब की दुकान बंद हो जाएगी तो बेरोजगार हो जाएंगे। हमने कहा, शराब का काम बंद करके दूध का व्यवसाय शुरू करो। हमें मालूम है कि शराब लॉबी कितनी मजबूत है और यह क्या-क्या करा सकती है।
सीमावर्ती क्षेत्र में ज्यादा शराब बेच रहा यूपी
शराब बंदी लागू करवाने के लिए नीतीश को सम्मानित किया गया
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नीतीश ने कहा, वह शराबबंदी लागू कर रहे हैं और यूपी अपनी सीमा पर ज्यादा शराब बेच रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री अखिलेश को पत्र लिखकर सीमावर्ती क्षेत्रों में शराब की बिक्री सीमित करने व निगरानी का आग्रह किया था। पत्र का जवाब तो दूर पावती तक नहीं मिली।
हमनें दुकानें बंद की तो यूपी के सीमावर्ती क्षेत्रों में शराब की और ज्यादा दुकानें खुल गईं। यूपी के एक्साइज एक्ट में प्रावधान है कि जहां दो जिलों की सीमा मिलती है उसके 5 किमी क्षेत्र में शराब दुकान नहीं खुलेगी।
इस प्रावधान को बिहार बॉर्डर से सटे जिलों मे लागू कराने का अनुरोध करते हुए बिहार के मुख्य सचिव ने यूपी के मुख्य सचिव को पत्र लिखा था। पर, कुछ नहीं हुआ।
नीतीश ने सपा महासचिव रामगोपाल यादव की बात पर पलटवार किया। कहा, ‘मैं कटोरा लेकर नहीं निकलने वाला। रामगोपाल ने कल कहा था कि नीतीश ने शराबबंदी लागू तो कर दिया लेकिन कुछ दिनों बाद पैसे मांगते घूमेंगे।
कहा कि उन्होंने काफी सोच-समझकर फैसला किया है। जनहित के काम कठिन हैं लेकिन शुरू कर दें तो कामयाबी मिलती है। केरल के चुनाव में शराबबंदी अहम मुद्दा है। तमिलनाडु में डीएमके, एआईडीएमएके ही नहीं तीसरे मोर्चे ने भी घोषणापत्र में शराबबंदी का वादा किया है।
हमारे विधायकों ने लिया शराब न पीने का संकल्प
बिहार के सीएम ने बताया कि जिस दिन शराबबंदी कानून पारित हुआ, उसी दिन बिहार के सभी विधायकों ने संकल्प लिया कि न शराब पिएंगे न पीने देंगे।
मुख्य सचिव से कर्मचारी तक और डीजीपी से सिपाही तक ने यही संकल्प लिया। थानों से भी अंडरटेकिंग ली गई है कि उनके क्षेत्रों में शराब का व्यापार नहीं हो रहा है।