संरक्षित स्मारक के सौ मीटर के दायरे में बने नौ मकानों को ढहाया जाएगा। मड़ियांव थानाक्षेत्र के नायक नगर में संरक्षित स्मारक के आसपास बने मकानों पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) ने आपत्ति जताई थी।
उसकी आपत्ति के बाद हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन और नगर निगम को इलाके में 2011 के बाद निर्मित नौ मकानों को 20 दिन में ढहाने को कहा है।
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नगर निगम और जिला प्रशासन ने मंगलवार को नौ मकानों के मालिकों को नोटिस जारी कर मकान बीस दिन में खाली करने को कहा है। नोटिस के बाद इन मकानों में रहने वाले लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
हंगामे की जानकारी के बाद मौके पर पहुंचे जिला प्रशासन व पुलिस के अधिकारियों ने मामला कोर्ट में लंबित होने की बात कही।
अधिकारियों ने कोर्ट में 27 नवंबर को इस प्रकरण पर सुनवायी होने हवाला देते हुए नाराज लोगों को शांत कराया। नोटिस पाने वाले बाशिंदों का कहना था कि वह अपने मकान किसी भी कीमत पर हटाने को राजी नहीं होंगे।
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जिला प्रशासन के मुताबिक मड़ियांव स्थित नायकनगर में 29 जून 1857 को निर्मित ऐतिहासिक धरोहर वाला एक स्तूप बना है।
एएसआई ने इसे संरक्षित इमारत घोषित कर वर्ष 2011 के बाद इसके सौ मीटर दायरे में बने मकानों को ढहाने का निर्देश जिला प्रशासन को दिया था।
बाद में इन मकानों के स्वामियों को न्यायालय में दाखिल जनहित याचिका की सुनवाई में भी कोई राहत नहीं मिली। 27 नवंबर को इस मामले की सुनवायी कोर्ट में होनी है।
इसके चलते ही मंगलवार को जिला प्रशासन की तरफ से नौ मकान मालिकों को ध्वस्तीकरण की कार्रवाई किए जाने व मकान खाली करने का नोटिस सौंपा गया है।
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एएसआई ने जिन नौ मकान मालिकों को नोटिस जारी किया है उसमें एसके पुरूषोत्तम, आरती श्रीवास्तव, रामकुमार जायसवाल, रूखसार अहमद, आरएस सिंह, संतोष मिश्रा, मनोज बंसल सहित दो अन्य लोग हैं।
वहीं, मड़ियांव के नायक नगर में लोगों के मकान गिराने की नोटिस ने एक बुजुर्ग महिला की जान ले ली। प्लाईवुड व्यवसाई की मां को जब मकान ढ़हने की सूचना मिली तो उन्हें हार्टअटैक पड़ गया।
घरवाले बुजुर्ग महिला को लेकर अस्पताल गए। जहां पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। व्यवसायी मनोज बंसल का कहना है कि मां पुष्पा (72) ने बड़े अरमानों से लगभग एक करोड़ की लागत से अपना मकान बनाया था।
मकान गिराए जाने के नोटिस के बाद उन्हें सदमा लग गया। उन्हें सीने में तेज दर्द उठा। मनोज अपनी मां को लेकर मेडिकल कॉलेज गया। जहां पर डॉक्टरों ने परीक्षण के बाद मां को मृत घोषित कर दिया।
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उधर, मड़ियांव क्षेत्र के मोहिबुल्लापुर के पास बनी हेनरी लॉरेंस की कब्र का निर्माण 29 जून 1857 को हुआ था। जिसे मेमोरियल पिलर मोहिबुल्लापुर के नाम से जाना जाता है।
इसे एएसआई ने रेजीडेंसी व मच्छी भवन का अंग मानकर संरक्षित इमारत घोषित कर रखा है। इतिहासकार डॉ. योगेश प्रवीन ने बताया कि अवध के रेजीडेंट हेनरी लारेंस की एक कब्र रेजीडेंसी परिसर में बनी हुई।
ऐसे में ये वो शख्स तो नहीं है। चूंकि आजादी के पहले गदर की लड़ाई तब मड़ियाव के इस इलाके पल्टन छावनी, मुकद्दीपुर, छोटा बेलीगारद में भी हुई थी। ऐसे में बहुत हद तक संभव है कि ये अंग्रेजों की सेना का कोई अन्य अधिकारी या सैनिक रहा हो।