सेमरी बाजार। 27 करोड़ की लागत से विरसिंहपुर में बने 100 शैया अस्पताल की व्यवस्था दो वर्ष बाद भी दुरुस्त नहीं हो सकी है। अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती न होने से मरीजों को भटकना पड़ता है। एक्सरे, सी-आर्म व सीबीसी मशीनें न होने से मरीजों को निजी पैथोलॉजी में जांच करानी पड़ती है। संसाधनों के अभाव में गंभीर बीमारी से पीड़ित व दुर्घटना में घायल मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद रेफर कर दिया जाता है।
अस्पताल में बाल रोग, महिला रोग, हड्डी रोग, दंत रोग, सर्जन और इमरजेंसी मेडिकल स्टाफ को मिलाकर कुल 13 चिकित्सक की तैनाती है। सोमवार पूर्वाह्न करीब 11 बजे नौ चिकित्सक नदारद रहे। डॉ. प्रिंस मोदी, डॉ. सोहन स्वरूप, डॉ. गिरिजेश पांडेय और डॉ. शिवम मिश्र ओपीडी में मरीजों को देख रहे थे। नेत्र रोग, बाल रोग व ईएनटी क्लीनिक बंद था। दंत रोग क्लीनिक में डॉक्टर की जगह फार्मासिस्ट बैठे थे।
सजवन हरिनाथपुर के राम गरीब ने बताया कि उनकी नातिन राशि के हाथ में फ्रैक्चर हो गया था। हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. धनंजय को दिखाने आए थे, काफी इंतजार करने के बाद पता चला कि वह आए ही नहीं है। इसलिए घर लौटना पड़ रहा है। प्राथमिक विद्यालय विरसिंहपुर की छात्रा निधि ने बताया कि पेट दर्द होने पर बाल रोग विशेषज्ञ को दिखाने आई थी, मगर उनकी अनुपस्थिति में दूसरे डॉक्टर से दवा लेनी पड़ी। करनाईपुर निवासी जगन्नाथ ने बताया कि सांस लेने में दिक्कत, खांसी, जुकाम और बुखार की शिकायत पर फिजिशियन को दिखाने आए थे, लेकिन अस्पताल में इनकी तैनाती ही नहीं है। दूसरे डॉक्टर को दिखाकर वापस जा रहे हैं।
ईएनटी विशेषज्ञ ने नहीं किया जॉइन
सीएमएस डॉ. राजकमल चौरसिया ने बताया कि ईएनटी विशेषज्ञ की तैनाती हुई थी, लेकिन उन्होंने जॉइन नहीं किया है। विशेषज्ञ चिकित्सक, एक्सरे, सी-आर्म व सीबीसी मशीन के लिए शासन को पत्र लिखा है।
11. विरसिंहपुर अस्पताल के प्रतीक्षालय में मरीजों की लगी भीड़। संवाद