कचहरी बम धमाकों के मामले में तारिक कासमी और खालिद मुजाहिद की गिरफ्तारी को संदिग्ध करार देने वाली आरडी निमेष आयोग की रिपोर्ट सरकार ने सोमवार को सार्वजनिक कर दी।
आयोग दोनों को गिरफ्तार करने वालों की पहचान तो नहीं कर सका लेकिन उसने जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की सिफारिश की है।
एसटीएफ ने दोनों को लखनऊ और फैजाबाद कचहरी में नवंबर 2007 में हुए विस्फोटों के सिलसिले में बाराबंकी रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया था।
तारिक कासमी अभी जेल में है जबकि गत 18 मई को पेशी से लौटते समय बाराबंकी में खालिद की मौत हो गई थी।
एसटीएफ ने दोनों की गिरफ्तारी 22 दिसंबर 2007 को बताई और उनके पास से जिलेटिन की 9 छड़ें, 3 डेटोनेटर और आरडीएक्स बरामद होने का दावा किया था।
जबकि खालिद, तारिक व उनके परिवारवालों ने बताया था कि उन्हें क्रमश: 12 और 16 दिसंबर को ही उठा लिया गया था।
इसकी शिकायतें पुलिस में की गईं। परिवारीजनों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के सवालों के बाद जांच के लिए आरडी निमेष आयोग बनाया गया।
आयोग के सुझाव
-आतंकी घटना में पुलिस से अलग किसी राजपत्रित अधिकारी को बरामदगी की कार्यवाही के दौरान गवाह बनाया जाए।
-कथित आरोपियों से पूछताछ की वीडियो रिकॉर्डिंग होनी चाहिए।
-जांच पुलिस की किसी दूसरी शाखा के राजपत्रित अधिकारी द्वारा ही की जानी चाहिए।
-ऐसी घटनाओं के निस्तारण के लिए विशेष न्यायालयों का गठन होना चाहिए।
-सरकार अभियोजन को कुशल वकील या प्रॉसिक्यूशन ऑफिसर उपलब्ध करवाए।
-ऐसे मामलों में अलग से अभियोजन सेल बनानी चाहिए।
-इन्हें जल्द सुलझाने के लिए अधिक से अधिक दो वर्ष का समय दिया जाना चाहिए।
-पीड़ित पक्षों के समुचित मुआवजे का प्रावधान होना चाहिए।
-अच्छा काम करने पर अधिकारी व कर्मचारी को पुरस्कृत होना चाहिए।
-निर्दोष लोगों को झूठा फंसाने के लिए जिम्मेदार को दंड देने का प्रावधान जरूरी है।