मुख्य सचिव डॉ. अनूपचंद्र पांडेय ने आदेश जारी करके चार समितियों का कार्यकाल जून में समाप्त घोषित कर दिया। इस आदेश के अनुसार ठोस अपशिष्ट, प्लास्टिक व जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन पर संस्तुतियां देने के लिए न्यायमूर्ति देवी प्रसाद सिंह की अध्यक्षता में गठित अनुश्रवण समिति का कार्यकाल भी 15 जुलाई को खत्म हो गया था।
मामला एनजीटी में पहुंचा तो वहां से फैसला दिया गया कि पर्यावरण को हो रहे नुकसान की भरपाई में राज्य मशीनरी असफल साबित हो रही है। इन समितियों का गठन कानून लागू करने में एनजीटी की मदद के लिए किया गया था। इसलिए प्रदेश सरकार बिना एनजीटी की अनुमति के कमेटियों को भंग नहीं कर सकती।
अगर इन कमेटियों की आगे जरूरत महसूस नहीं हुई तो इनका कार्यकाल 31 दिसंबर 2019 तक जारी रहेगा। पर्यावरण में सुधार के लिए प्रदेश सरकार अपने स्तर पर कोई कमेटी बनाती है, तो इस पर कोई आपत्ति नहीं है। एनजीटी के इस आदेश के तहत मंगलवार को प्रदेश सरकार ने भी समितियों को बहाल करने संबंधी शासनादेश जारी कर दिया गया।