नवजात के इलाज की जानकारी देते चिकित्सक।
लखनऊ। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के महाप्रबंधक (बाल स्वास्थ्य) डॉ. मिलिंद वर्धन ने कहा कि प्रसव के बाद लगभग 10-15 प्रतिशत नवजातों को सांस लेने में कठिनाई जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में यदि जन्म के पहले 60 सेकंड (गोल्डन मिनट) के भीतर सही चिकित्सीय प्रबंधन मिल जाए तो शिशु की जान बचाने के साथ भविष्य की मानसिक और शारीरिक दिव्यांगता से भी बचा सकते हैं।
वह रविवार को वीरांगना अवंतीबाई महिला अस्पताल में आयोजित नियोनेटल रेससिटेशन प्रोग्राम (नवजात पुनर्जीवन) के तहत प्रशिक्षण कार्यक्रम में स्वास्थ्यकर्मियों को संबाेधित कर रहे थे। एनएचएम और स्वास्थ्य विभाग के तत्वावधान एवं नेशनल नियोनेटोलॉजी फोरम के सहयोग से हुए आयोजन में परिवार कल्याण विभाग के अपर निदेशक डॉ. अजय गुप्ता और डॉ. सलमान ने बताया कि नवजात मृत्यु दर में कमी लाने की दिशा में यह बहुत उपयोगी साबित होगा। अस्पताल की प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ज्योति मल्होत्रा, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रेनू पंत, केजीएमयू की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. शालिनी त्रिपाठी एवं नेशनल नियोनेटोलॉजी फोरम के सचिव डॉ. आकाश व 80 प्रतिभागी मौजूद रहे।
नवजात के इलाज की जानकारी देते चिकित्सक।
नवजात के इलाज की जानकारी देते चिकित्सक।
नवजात के इलाज की जानकारी देते चिकित्सक।