सुल्तानपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेज से लखनऊ लाए गए नवजात की वेंटिलेटर न मिलने से मौत हो गई। इस पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने शुक्रवार को अफसरों को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेश चिकित्सा विभाग के अपर मुख्य सचिव (एसीएस) को लापरवाही की जांच कराने का आदेश दिया है। साथ ही सरकार से ऐसे मामलों को संभालने की कार्ययोजना भी मांगी है।
कोर्ट ने कहा कि सरकारी अस्पतालों का यही हाल है। सुल्तानपुर में तीन साल पहले मेडिकल कॉलेज खुला लेकिन वहां वेंटिलेटर और कोई बाल रोग सर्जन नहीं है जबकि प्रसव उसी अस्पताल में होते हैं। प्रसव होने पर ऐसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जिसमें बाल रोग विशेषज्ञ या सर्जन की जरूरत हो लेकिन यहां ये सुविधाएं नहीं हैं। हमें नहीं पता कि प्रदेश के कितने मेडिकल कॉलेजों में यही हाल है।
सुल्तानपुर के सरकारी स्वायत्त चिकित्सा महाविद्यालय में 25 जुलाई 2026 को नवजात के जन्म के बाद जन्मजात जटिलताओं के कारण जरूरी वेंटिलेटर और अन्य सेवाएं नहीं मिल सकीं। नवजात को केजीएमयू में भर्ती कराया गया। यहां डॉक्टरों ने ऑक्सीजन सुविधा वाले बेड उपलब्ध नहीं होने के कारण इलाज करने में असमर्थता जता दी। नवजात को डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान ले जाया गया, लेकिन यहां भी बेड नहीं मिला। यहां से शिशु को पीजीआई ले जाया गया, लेकिन वहां भी बेड नहीं मिल सका। इसके चलते 24 घंटे के भीतर 26 जुलाई 2026 को नवजात की मृत्यु हो गई।