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Lucknow News: आस्था से सजी नववर्ष की सुबह

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आस्था से सजी नववर्ष की सुबह
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लखनऊ। नववर्ष की पहली सुनहरी किरण जैसे ही गोमती की लहरों पर थिरकी, नवाबों का शहर एक अलग ही खुमारी में जागा। फिजाओं में शुभकामनाओं की मिठास घुली थी और मंदिरों की घंटियों के स्वर के साथ पार्कों में गूंजती हंसी ने नववर्ष का मधुर संगीत रच दिया।
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सूरज की पहली किरण के साथ ही बड़ी काली जी मंदिर, खाटू श्याम, हनुमान सेतु और हनुमत धाम में श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा। भक्तों ने दर्शन-पूजन कर सुख-समृद्धि की कामना की। जगह-जगह धार्मिक अनुष्ठान और भंडारों का आयोजन हुआ। यह दृश्य इस बात का प्रमाण था कि आधुनिकता की दौड़ में भी राजधानी अपनी जड़ों और परंपराओं से उतनी ही मजबूती से जुड़ी हुई है।

भजन संध्या में गूंजे मां के भजन
लखनऊ। चौक सि्थत मठ श्री बड़ी काली जी मंदिर में बृहस्पतिवार को नव वर्ष पर चौकी एवं भजन संध्या हुई। भजन गायक राम प्रताप लखा और गायिका साक्षी कंधारी ने लाल-लाल चुनरी..., बन महाकाल की काली जैसे गीतों की मनमोहक प्रस्तुतियां पेश कर मंत्रमुग्ध कर दिया। समापन पर भंडारा हुआ। इस दौरान अभय उपाध्याय, शुभम पांडेय, देवराज सिंह, आदर्श मिश्रा, विजय गुप्ता, राहुल, तुषार, मेघनाश, आशा तिवारी आदि लोग मौजूद रहे।
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भंडारा कर मनाया नव वर्ष
नव वर्ष डॉ. बी एन वर्मा मार्ग स्थित परमानंद गुरुद्वारे के पास छबलानी परिवार की ओर से भंडारा लगा। इस दौरान सुरेश छाबलानी, दिलीप छाबलानी, आशा, मंजु, अमरनाथ चौधरी, जेपी नागपाल, प्रकाश गोधवानी रमेश बालानी, अनिल अग्रवाल, अनुज गौतम, रमेश सिंह आदि लोग मौजूद रहे।

501 किलो फूलों से सजा हनुमान मंदिर
लखनऊ। अलीगंज स्थित नए हनुमान मंदिर में बृहस्पतिवार को भक्तों का हुजूम देखने को मिला। पूरे दिन भंडारा चला। मुख्य पुजारी जगदंबा प्रसाद ने बताया कि मंदिर को 501 किलो फूलों से सजाया गया। सुबह से रात तक करीब दो लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। वहीं, अहियागंज सि्थत सिद्धेश्वर मंदिर से मनकामेश्वर मंदिर तक भव्य शोभायात्रा निकाली गई। सुबह आठ बजे यात्रा मनकामेश्वर मंदिर पहुंची तो भंडारा लगाया गया। महंत देव्या गिरी ने बताया कि दिनभर चले भंडारे में भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया।

सड़कों से मॉल तक छाया जश्न-ए-बहार
नववर्ष के पहले दिन मॉल, कैफे और पार्क दोस्तों की महफिलों से गुलजार रहे। कहीं चाय की टपरी पर साल भर की योजनाओं पर चर्चा हो रही थी, तो कहीं सेल्फी के जरिये यादों को हमेशा के लिए सहेजा जा रहा था। कोई अपनों के चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए सड़क किनारे बुके खरीदता नजर आया। राजधानी के हर कोने में जश्न-ए-बहार का रंग चढ़ा रहा।

आस्था से सजी नववर्ष की सुबह

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