मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्वी उत्तर प्रदेश में कुछ लोग पासपोर्ट बनवाने और लोगों को विदेश भेजने की दुकान खोलकर बैठे हैं। यह लोग लोगों को विदेशों में नौकरी दिलाने के नाम पर मोटी रकम ऐंठते हैं और दिल्ली के एयरपोर्ट पर ले जाकर छोड़ देते हैं और उनसे कहते हैं कि यही कुवैत और दुबई है। जिन लोगों को विदेश भेज भी देते हैं, उनके साथ भी धोखा होता है। उन्हें जिस नौकरी के लिए ले जाया जाता है, उसके बदले दूसरी नौकरी कराई जाती है।
अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश कुमार अवस्थी ने कहा कि आने वाले दिनों में विदेश जाने वालों की संख्या में बढ़ोतरी होगी। ऐसे में पासपोर्ट कार्यालय की जिम्मेदारी बढ़ेगी। उन्होंने सभी जिलों से आए पासपोर्ट नोडल अधिकारियों से कहा कि सरकार जीरो टॉलेरेंस की नीति पर काम कर रही है, जो भी भ्रष्टचार में लिप्त पाया जाए उसके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए।
डीजीपी ओमप्रकाश सिंह ने कहा कि पिछले दो सालों में सरकार ने तकनीक का सफल प्रयोग करते हुए कई आयाम स्थापित किए हैं। उन्होंने कहा कि इस एप के माध्यम से पुलिस सत्यापन तीन दिन के अंदर करेंगे तभी हम सफल होंगे।
क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी पीयूष वर्मा ने बताया कि इस एप को दुनिया भर में स्थित 190 दूतावासों से जोड़ा गया है। विदेश में रह रहे भारतीयों का भी इस एप के माध्यम से सत्यापन किया जा सकता है। बीते वर्ष उत्तर प्रदेश में 11 लाख लोगों ने पासपोर्ट बनवाया। इसमें केवल लखनऊ क्षेत्र से 5 लाख 88 हजार पासपोर्ट जारी हुए।
अभी तक जिले से थाने के बीच की व्यवस्था मैनुअल थी, जिससे समय लगता था। अब पासपोर्ट के लिए आवेदन करते ही संबंधित थाने को इसकी जानकारी हो जाएगी और वह तीन दिन से कम समय में अपनी रिपोर्ट भेज सकता है।
इसके लिए प्रत्येक थाने पर आवश्यकतानुसार एक या एक से अधिक टैबलेट उपलब्ध कराए गए हैं। कार्यक्रम में गाजियाबाद के क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी धर्मेंद्र सिंह, डीजी इंटेलीजेंस भवेश कुमार सिंह सहित कई अधिकारी मौजूद थे।