शासन ने शुल्क प्रतिपूर्ति और छात्रवृत्ति के मामले में बड़े बदलाव का फैसला लिया है। जिलों के बजाय अब राज्य मुख्यालय ट्रेजरी से सीधे छात्रों के बैंक खाते में रकम भेजी जाएगी।
प्रमुख सचिव (समाज कल्याण) सुनील कुमार का कहना है कि घपलों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए ऐसा करना जरूरी है।
शुल्क प्रतिपूर्ति और छात्रवृत्ति वितरण में एक के बाद एक घोटाले सामने आ रहे हैं। पिछले हफ्ते ही गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) में 11.33 करोड़ रुपये के गबन की रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।
वहां 1718 छात्रों के खातों में कई-कई बार राशि भेजकर वहां घपले को अंजाम दिया गया।
इस मामले में तत्कालीन जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी, तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी और तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी समेत 76 लोगों को आरोपी बनाया गया है।
एक ही जिले में इतना बड़ा घपला सामने आने पर शासन में खलबली मच गई और पारदर्शिता लाने के लिए नई नियमावली तैयार कराई गई।
पिछले साल तक जिलास्तरीय अधिकारियों के माध्यम से रकम विद्यार्थियों के खाते में भेजी जाती थी, लेकिन नई नियमावली में पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (पीएफएमएस) के तहत सीधे छात्रों के खाते में रकम भेजने की व्यवस्था की गई है।
यानी जवाहर भवन स्थित ट्रेजरी से छात्रों के खाते में सीधे रकम भेजी जाएगी। प्रमुख सचिव (समाज कल्याण) सुनील कुमार ने बताया, ‘हाईकोर्ट के आदेशानुसार वरीयता सूची राज्य स्तर पर ही तैयार की जा रही है।
इसलिए राशि भी यहां से भेजने में कोई दिक्कत नहीं आएगी। नई व्यवस्था लागू होने पर गौतमबुद्ध नगर सरीखे घपले की पुनरावृत्ति भी रोकी जा सकेगी।’