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केजीएमयू में खुला थोरेसिक सर्जरी विभाग

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फेफड़ों और दिल के आसपास के अंगों का हो सकेगा बेहतर इलाज
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केजीएमयू में थोरेसिक सर्जरी का नया विभाग बन गया है। इससे लंग्स, इसोफेगस सहित दिल के आसपास के अन्य अंगों का बेहतर इलाज हो सकेगा। इसका विभागाध्यक्ष प्रो. शैलेंद्र सिंह यादव को बनाया गया है। केजीएमयू कार्य परिषद कि बैठक में इसे मंजूरी दे दी गई है।
देश में अभी तक एम्स कोलकाता और सर गंगाराम अस्पताल नई दिल्ली में थोरेसिक सर्जरी विभाग है। अन्य चिकित्सा संस्थानों में कार्डियोवैस्कुलर एंड थोरेसिक सर्जरी विभाग है। ऐसे में हार्ट के मरीजों को इलाज मिलता है और थोरेसिक सर्जरी वाले मरीजों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है। नया विभाग बनने से थोरेसिक सर्जरी वाले मरीजों को प्राथमिकता के आधार पर इलाज मिल सकेगा। केजीएमयू में खुलने वाले इस विभाग में विभागाध्यक्ष के अलावा दो अन्य संकाय सदस्य रहेंगे। इस विभाग को नवनिर्मित कार्डियोलोजी भवन में स्थापित किया जाएगा।
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नियुक्ति और पदोन्नति को मिली मंजूरी
केजीएमयू में अलग-अलग विभागों में करीब 41 लोगों की नियुक्ति और 27 लोगों की पदोन्नति को भी मंजूरी दी गई। इसी तरह लोहिया संस्थान के निदेशक रहे प्रो. एके त्रिपाठी को फिर से हेमेटोलॉजी का विभागाध्यक्ष बनाया गया है।
रेडियोथेरेपी विभागाध्यक्ष पर अभियोजन चलाने की मंजूरी
केजीएमयू कार्यपरिषद की बैठक में रेडियोथेरेपी विभागाध्यक्ष डॉ. राजीव गुप्ता के खिलाफ चल रही सीबीआई जांच में अभियोजन चलाने की मंजूरी दे दी गई है। कार्य परिषद में प्रस्ताव पारित होने के बाद डॉक्टर पर कड़ी कार्रवाई की बात कही जा रही है।
डॉ. राजीव गुप्ता व पत्नी डॉ. सुनीता गुप्ता के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का केस दर्ज है। डॉ. सुनीता रेलवे हॉस्पिटल में कार्यरत रही हैं। सीबीआई ने 12 जुलाई 2016 को डॉक्टर दंपती के ठिकानों पर जांच की थी। उनके घर से 1.59 करोड़ रुपये व डॉ. सुनीता के लॉकर से 9.43 लाख रुपये बरामद हुए थे। सीबीआई जांच में डॉक्टर दंपती की कुल आय उनकी आमदनी से करीब 1.81 करोड़ रुपये अधिक पाई गई। इसके बाद वर्ष 2019 में मुकदमा दर्ज कर तफ्तीश शुरू की गई। अब सीबीआई ने मामले की रिपोर्ट तैयार कर अभियोजन चलाने के लिए शासन को पत्र लिखा था। शासन से केजीएमयू प्रशासन को इस मामले में पत्र भेजा गया था। ऐसे में पूरा प्रकरण शुक्रवार को हुई कार्यपरिषद की बैठक में रखा गया। कुलपति लेफ्टिनेंट डॉ. बिपिन पुरी ने बताया के डॉ. राजीव गुप्ता पर अभियोजन चलाने के लिए कार्यपरिषद ने मंजूरी दे दी है।
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डॉ. राजीव बोले, गलत फंसाया गया
इस मामले में डॉ. राजीव गुप्ता ने कहा कि उन्हें कार्यपरिषद के फैसले की अभी जानकारी नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि उन्हें और उनकी पत्नी को गलत तरीके से मामले में फंसाया गया है। न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है।
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