राज्य सरकार ने दिल्ली व मुंबई की तर्ज पर बिल्डरों को बकाया वाणिज्य कर जमा करने की सुविधा देने के लिए एकमुश्त समाधान योजना लाने का निर्णय किया है।
मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में इसे मंजूरी दी गई। इस योजना के तहत बिल्डरों को अनुबंध में दिखाई गई राशि या स्टांप एक्ट के अनुसार देय स्टांप ड्यूटी के लिए तय राशि में से जो भी अधिक होगा, उसका एक से तीन फीसदी तक टैक्स देना होगा।
फ्लैट निर्माण में इस्तेमाल होने वाला सामान यूपी से खरीदने वालों को एक प्रतिशत और राज्य के बाहर से सामान मंगाने वालों को तीन प्रतिशत टैक्स देना होगा।
समाधान योजना अपनाने वाले बिल्डर के सभी प्रोजेक्ट इसके दायरे में आएंगे। योजना अपनाने वाले बिल्डर समाधान राशि यथावत रहने तक इससे बाहर नहीं जा पाएंगे।
योजना लागू होने के 30 दिन में बिल्डरों को कर निर्धारण अधिकारी को इसके लिए प्रार्थना पत्र देना होगा। इसके बाद 30 से 60 दिन के अंदर समाधान योजना अपनाने के लिए 10 हजार रुपये विलंब शुल्क देना होगा।
वर्ष 2011-12 के बाद से वाणिज्य कर जमा न करने वाले बिल्डर इस योजना का लाभ ले सकेंगे। इस योजना में आने वाले बिल्डर न तो इनपुट टैक्स क्रेडिट ले सकेंगे और न ही टैक्स इनवॉयस जारी कर सकेंगे। समय से टैक्स न देने वाले बिल्डरों से भू-राजस्व की भांति वसूली होगी।