इस क्रिसमस सुप्रीम कोर्ट ने मरीजों के लिए भी सौगातों का खजाना खोलेगा। 25 दिसंबर से बीमारियों के इलाज पर आने वाला खर्च आधे से भी कम हो जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद नेशनल एसेंशियल ड्रग लिस्ट (एनईडीएल) में शामिल 620 दवाओं के दाम कम होने से ये उम्मीद जगी है।
348 साल्ट से बनायी जाने वाली ये दवाएं इलाज में सबसे ज्यादा प्रयोग की जाती हैं। मरीजों की हित में फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इन दवाओं के दाम एनडीपीओ के अनुसार कम करने के निर्देश दिए हैं।
इससे दवाओं के दाम 40 से 60 फीसदी तक कम हो जाएंगे। क्रिसमस डे से इस लिस्ट में शामिल सभी दवाओं को घटे हुए दामों पर ही बेचना होगा। चाहे उन पर पुराने बढ़े हुए रेट ही लिखे हों। बढ़े हुए रेट पर दवाएं बेचने वालों पर कार्रवाई भी की जा सकती है।
इलाज के दौरान महंगी दवाओं के बोझ से परेशान मरीजों और उनके परिवारों के लिए अच्छी खबर है। नए ड्रग प्राइस कंट्रोल ऑर्डर (एनडीपीओ-2013) के कारण दवाओं के दाम में भारी कमी हो जाएगी।
नेशनल एसेंशियल ड्रग लिस्ट (एनईडीएल) में शामिल इन दवाओं के दाम कम किए जाने के केंद्र सरकार के आदेश के बाद 28 अगस्त के बाद 350 तरह की दवाओं के मूल्य कम किए गए थे।
इनमें एंटीबायोटिक से लेकर बीपी, पेट दर्द तक की दवाएं शामिल थीं। इन दवाओं का नए ड्रग्स प्राइस कंट्रोल ऑर्डर (डीपीसीओ) के तहत नए सिरे से मूल्य निर्धारण किया गया है।
अभी तक कंपनियां अपने हिसाब से दवाओं के रेट रखती थी। एक ही साल्ट की अलग-अलग ब्रांड की दवाओं में जमीन-आसमान का अंतर होता था।
15 मई को डीपीसीओ के आदेश के बाद 14 जून को 151 दवाओं, 21 जून को 26, 28 जून को 51, 5 जुलाई को 25 और 22 जुलाई को 26 दवाओं का मूल्य निर्धारण किया गया।
नई खेप उतारने को 45-45 दिन का समय दिया गया। जब इस दौरान भी दवाओं पर कम रेट नहीं प्रिंट हो पाए तो फिर 30-30 अतिरिक्त दिनों का वक्त दिया गया।
अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद लगभग 348 साल्ट से बनी 620 दवाओं को कम दाम पर बेचना होगा। राजधानी केदवा विक्रेताओं की मानें तो रेट कम होने का असर ब्रांडेड कंपनियों पर ज्यादा पड़ा है।