प्रदेश में आने वाले समय में नई ही नहीं 2000 मेगावाट से ज्यादा क्षमता की पुरानी इकाइयों का भी दारोमदार भी चीन पर हो सकता है। पर्यावरण के नए मापदंडों के अनुसार 25 साल से अधिक पुराने ताप बिजली घरों में प्रदूषण नियंत्रण के लिए फ्लू गैस डिसल्फराइजेशन प्रणाली (एफ जीडीएस) लगाना अनिवार्य कर दिया गया है।
केंद्रीय वित्त मंत्री ने इस साल के बजट में इसका एलान कि या था। प्रदेश के अनपरा ए बिजली घर की 210-210 मेगावाट क्षमता की तीन, अनपरा बी की 500-500 मेगावाट की दो, ओबरा की 200-200 मेगावाट की पांच इकाइयां, पारीछा की 110-110 मेगावाट की दो, 210 मेगावाट की दो व 250 मेगावाट की दो, तथा हरदुआगंज की 110 मेगावाट की एक व 250 मेगावाट की दो इकाई में एफजीडीएस की स्थापना के लिए 300 करोड़ रुपये के टेंडर हुए हैं। सूत्रों के अनुसार ग्लोबल टेंडर के कारण इसमें भी चीन की कंपनियां एल-1 आई हैं। यानी एफजीडीएस लगाने में भी चीनी कंपनियों का दबदबा बना हुआ है।
ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे का कहना है कि चीन से टकराव के चलते आत्मनिर्भर भारत की बात कही जा रही है। इसके लिए पावर सेक्टर में बीएचईएल को सशक्त बनाना होगा। बीएचईएल सार्वजनिक क्षेत्र की नवरत्न कंपनी है इसलिए इसे पावर सेक्टर के काम बिना टेंडर के दिए जा सकते हैं। चीन को ग्लोबल टेंडर का फायदा मिलता है। इससे टेंडर में लगने वाला समय भी बचेगा और आत्मनिर्भर भारत का सपना भी साकार होगा।
ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा
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ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा का कहना है कि हमने तय किया कि भविष्य में चीनी उपकरणों का इस्तेमाल नहीं करेंगे। प्रयास किया जाएगा कि जो भी उपकरण लगाए जाएं वे पूर्ण रूप से भारतीय हों या चीन निर्मित या आयातित न हों।
सूत्रों के अनुसार निजी क्षेत्र की 1200 मेगावाट क्षमता की अनपरा सी व 1200 मेगावाट की रोजा परियोजना में छोटे से लेकर बड़े तक सारे उपकरण चीन के ही लगाए गए हैं। ये प्लांट चीन की शंघाई इलेक्ट्रिक कंपनी ने तैयार किए हैं। इन बिजली घरों की पूरी बिजली यूपी को ही मिलती है।