शहरी क्षेत्रों में बसी अवैध कॉलोनियों को वैध करने के लिए नई नीति लाने की तैयारी है।
नई नीति में वर्ष 2008 के पहले बनी कॉलोनियों को वैध किया जाएगा। आवास एवं शहरी नियोजन विभाग ने इसके लिए विकास प्राधिकरणों और आवास विकास परिषद से शहरी क्षेत्रों में बसी ऐसी कॉलोनियों की सूची मांगी है।
हालांकि, पूर्व में तैयार सूची के आधार पर ऐसी करीब 2463 कॉलोनियां हैं जो वर्ष 2008 से पहले की बनी हुई बताई जा रही हैं।
आवास एवं शहरी नियोजन विभाग चाहता है कि शहरों में बसी पुरानी कॉलोनियों को वैध कर दिया जाए। इसके लिए पुरानी नीति का सरलीकरण कर दिया जाए।
पुरानी नीति वर्ष 2009 में लाई गई थी, लेकिन इसमें इतनी तकनीकी खामियां थीं कि रेजीडेंस वेलफेयर सोसायटियां हिम्मत नहीं जुटा पाईं। इसलिए आवास विभाग चाहता है कि नियमों को काफी सरल कर दिया जाए।
यही नहीं विचार किया जा रहा है कि मानक पूरा करने वाली कॉलोनियों से विकास शुल्क न लिया जाए, ताकि इसका अधिक से अधिक फायदा सोसायटियां उठा सकेंगी।
आवास विभाग का मानना है कि कॉलोनियों को वैध करने के नियम के सरलीकरण से विकास प्राधिकरणों को अन्य कई मद में काफी शुल्क मिल जाएंगे।
नई नीति में सड़क, स्ट्रीट लाइट, पार्क और अन्य जन सुविधाएं कॉलोनी में होने पर उससे विकास शुल्क नहीं लिया जाएगा।
सड़क, पार्क एवं खुले क्षेत्र मानक से कम हैं तो उससे पूर्व में तय दंड शुल्क नहीं लिया जाएगा। यथासंभव मौके पर जो निर्माण हो चुका है, उनके अनुसार ही लेआउट बनवाया जाएगा।