मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सोमवार को सूबे का सबसे बड़ा अनुपूरक बजट पेश किया। नई योजनाओं की झड़ी लगा दी। हर क्षेत्र के लिए कुछ न कुछ देने का संदेश दिया, पर दूसरे पहलू की ओर झांकें तो साफ हो जाता है कि सरकार कई नई योजनाओं के लिए पैसे का बंदोबस्त नहीं कर पाई है।
ज्यादातर योजनाओं के हिस्से टोकन मनी ही है। यानी इसे नाम बड़े, दर्शन छोटे ही की तरह ले सकते हैं। आर्थिक विश्लेषक भी इसे सरकार की आर्थिक तंगहाली के संकेत के रूप में देख रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने अनुपूरक बजट में 50 से ज्यादा नई योजनाओं का ऐलान किया। इसमें शहरों के कायाकल्प के लिए पेश ‘अमृत’ व ‘स्मार्ट सिटी मिशन’ को शामिल कर केंद्र से कदमताल का संदेश देने की कोशिश की है तो केंद्र की बंद हुई योजनाओं का अपने बजट से विकल्प पेश कर यह दिखाया है कि उपयोगी योजनाओं को वह अपने स्तर पर आगे बढ़ाने को तैयार है।
मगर, नई योजनाओं के जरिये वह ‘संदेश’ के आगे नहीं बढ़ पाई है। अमृत व स्मार्ट सिटी के लिए सरकार ने टोकन मनी भर का प्रावधान ही किया है। इसी तरह भारत नेट, यूपी ई-गवर्नेंस एक्शन प्लान, ई डिस्ट्रिक्ट योजना में ग्राम विकास अधिकारियों व ग्राम पंचायत अधिकारियों को लैपटॉप देने तथा नई तहसीलों में उप जिलाधिकारियों व नायब तहसीलदारों के लिए वाहन खरीदने के अलावा तिलहन उत्पादन व रेशम विकास की नई योजनाओं केलिए भी टोकन मनी का ही बंदोबस्त किया गया।
इन योजनाओं में भी बस टोकेन मनी
सरकार ने अनुपूरक बजट में सिंचाई विभाग की तमाम पुरानी योजनाओं के लिए पैसे का बंदोबस्त करने के अलावा 16 नई योजनाओं को शामिल किया है। लेकिन इनमें से 12 के लिए पैसे का बंदोबस्त नहीं है। नौ योजनाओं के लिए 1000-1000 रुपये व एक योजना के लिए 3000 रुपये टोकन मनी का बंदोबस्त किया गया है।
बड़ा सवाल : अनुदान के तहत बचत कैसे होगा
बजट के जानकार बताते हैं कि सरकार को टोकन मनी वाली योजनाओं के लिए पैसे का बंदोबस्त किसी चुनौती से कम नहीं होगा। वजह, सरकार ने इनके लिए पैसे का बंदोबस्त अनुदान के तहत बचत से करने की बात कही है। मगर, अनुदान से बचत होगी कैसे, इसका जवाब नहीं मिलता।
इनके हिस्से सिर्फ 1000 रुपये की टोकन मनी
- केंद्र सरकार के स्मार्ट सिटी मिशन के लिए।
- केंद्र सरकार केअटल मिशन फॉर रिजूवेशन एंड अर्बन ट्रांसफार्मेशन (अमृत) के तहत विभिन्न कार्यों के लिए।
- रेशम क्रियाकलापों का विकास योजना के तहत शहतूत सेक्टर व एरी सेक्टर के लिए।
इन योजनाओं के लिए इतना होगा प्रबंध
- लखनऊ से आजमगढ़ के रास्ते बलिया तक प्रस्तावित एक्सप्रेस-वे के लिए टोकन मनी, वह भी कंसल्टेंट की फीस पर खर्च होगा।
- भारत नेट के तहत 2.5 लाख ग्राम पंचायतों में ऑप्टिकल फाइबर के जरिये ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी के लिए।
- यूपी ई-गवर्नेंस एक्शन प्लान।
- प्रदेश के 65 जिलों में तिलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए किसानों को सहायता।
- ई डिस्ट्रिक्ट योजना के तहत ग्राम्य विकास अधिकारियों व ग्राम पंचायत अधिकारियों को टैबलेट, स्मार्टफोन या लैपटॉप देने के लिए।
- प्रदेश के कारागारों में विभिन्न उपकरणों की खरीद के लिए।
- स्टेट रिसोर्स सेंटर फॉर वुमेन एंड चाइल्ड के लिए।
- नवसृजित 15 तहसीलों के एसडीएम व तहसीलदारों के वाहन के लिए।
- तीन वर्ष या उससे अधिक समय से गैर संचालित वैयक्तिक लेखा खातों में बची रकम के समायोजन के लिए।
- एमडीएम के लिए केंद्रीयकृत किचन निर्माण व स्थापना के लिए।
- डायट के कार्यालय संचालन के लिए।
- कॉलेज ऑफ टीचर एजुकेशन के संचालन के लिए।
-राजकीय सेंट्रल पेडागाजिकल इंस्टीट्यूट इलाहाबाद को उच्चीकृत कर इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस स्टडीज इन एजुकेशन बनेगा।
- मिर्जापुर व लखीमपुर में स्पर्श राजकीय दृष्टिबाधित बालिका इंटर कॉलेज के लिए।
-सिंचाई विभाग की 12 योजनाओं के लिए भी टोकन मनी।