New lithotripsy machine will be installed in KGMU
लखनऊ। केजीएमयू में पथरी के मरीजों को राहत देने के लिए पीपीपी मॉडल पर नई मशीनें लगाई जा रही हैं। इनके लगने के बाद पथरी के मामलों में सटीक जांचें की जा सकेंगी। इससे पथरी बनने के कारणों की भी पड़ताल हो सकेगी। अभी तक यह सुविधा एसजीपीजीआई में ही है। केजीएमयू के मीडिया प्रभारी डॉ. सुधीर सिंह ने बताया कि यूरोलॉजी विभाग में कई नई मशीनें लगने से मरीजों को काफी राहत मिलेगी। इनकी टेंडर प्रक्रिया हो रही है।
केजीएमयू में अभी तक यूरोलॉजी विभाग के साथ ही जनरल सर्जरी विभाग में भी पथरी का इलाज किया जाता है। सामान्य दिनों में यूरोलॉजी विभाग में 20 से 25 और जनरल सर्जरी विभाग में 10 से 15 मरीज पथरी से जुड़ी बीमारियां लेकर आते हैं। इन दिनों कोरोना की वजह से सिर्फ 70 मरीज देखे जा रहे हैं। ऐसे में पथरी से जुड़े मरीजों की संख्या भी कम हो गई है। फिलहाल दोनों विभाग पथरी की स्थिति के अनुसार सर्जरी करते हैं। लेकिन यहां अभी तक जांच से जुड़ी कई मशीनें नहीं है। ऐसे में नई मशीन लगाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। यहां अब एक्स्ट्रा कॉरपोरियल शॉक वेव लिथोट्रिप्सी मशीन लगेगी। इसके लगने से किडनी स्टोन की स्थितियों के बारे में सटीक जानकारी मिल सकेगी। इसी तरह स्टोन एनालिसिस मशीन भी लगेगी। जिन लोगों में बार-बार पथरी बनती है, उनके लिए यह काफी कारगर होगी। इस मशीन से पता लगाया जाएगा कि बार-बार बनने वाली पथरी में कौन कौन से प्रमुख तत्व हैं जिसकी अधिकता से पथरी बन जा रही है। ऐसे में संबंधित मरीज को शरीर में बनने वाले ज्यादा तत्वों को कम करने की दवा देकर पथरी बनने से रोका जा सकेगा। यहां बोन मिनरल डेंसिटी मशीन भी लगाई जा रही है। इस मशीन से हड्डियों की मजबूती का पता लगाया जाता है। इस मशीन से मरीज के शरीर में कैल्शियम के स्तर की पड़ताल हो सकेगी। इन मशीनों के लगने से पथरी के मरीजों की सटीक जांच हो सकेगी।