प्रदेश सरकार ने उद्योगों की स्थापना को बढ़ावा देने के लिहाज से जमीन आवंटन के लिए एक नीति बनाने का फैसला किया है।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के निर्देश के बाद अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग ने इस संबंध में कार्यवाही शुरू कर दी है। विभाग ने नीति तैयार करने के लिए कंसलटेंट नियुक्त करने का फैसला किया है।
नई नीति गुजरात, हरियाणा, एमपी, राजस्थान और उत्तराखंड जैसे राज्यों की मौजूदा नीतियों का अध्ययन कर तैयार की जाएगी।
तैयार हो गया डेटा
अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सूबे में खाली पड़ी सरकारी व सहायता प्राप्त संस्थाओं की जमीन का डेटा तैयार करा लिया गया है।
अब उद्यमियों को पारदर्शी तरीके से जमीनें उपलब्ध कराने के लिए औद्योगिक जमीन आवंटन नीति (इंडस्ट्रियल लैंड एलॉटमेंट पॉलिसी) तैयार करने की कार्यवाही शुरू की गई है।
प्रस्तावित नीति पर विशेषज्ञ सलाह व अन्य कार्यवाही के लिए इस क्षेत्र में कार्यरत एक संस्था को बतौर कंसलटेंट नियुक्त किया जा रहा है।
लगेगा तीन महीना
उद्योग बंधु ने इसके लिए बिड आमंत्रित कर लिया है। 24 जुलाई को टेक्निकल बिड और 25 को फाइनेंसियल बिड खोली जाएंगी। चयनित संस्था को इस नीति को सरकार के सामने अनुमोदन के लिए पेश करने को तीन महीने का वक्त दिया जाएगा।
इस नीति से उद्यमियों को उद्यम लगाने के लिए जमीन के जुगाड़ के लिए अभी आने वाली तमाम मुश्किलों से राहत मिल जाएगी।
गौरतलब है कि प्रदेश में औद्योगिक क्षेत्र के विस्तार को लेकर कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर विचार हो रहा है। ईस्टर्न डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के अंतर्गत कई इन्वेस्टमेंट जोन विकसित करने का प्रस्ताव है।
केंद्र के सहयोग से लागू हो रही यह योजना सरकार की शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके अलावा नए उद्योगों की स्थापना में जमीनों की समय से उपलब्धता अड़चन के रूप में सामने आती है।
शासन ने इसी के मद्देनजर नई अवस्थापना एवं औद्योगिक निवेश नीति में लैंड बैंक बढ़ाने का प्रस्ताव किया था।