खराब माली हालत से जूझ रहे सरकारी अस्पतालों की सेहत सुधारने को राज्य सरकार निजी क्षेत्र की मदद लेगी।
सूबे में निजी क्षेत्र की मदद से सुपरस्पेशियलिटी अस्पताल भी खुलेंगे।
गरीबों तक महंगे इलाज की पहुंच कराने के लिए राज्य सरकार ने यह निर्णय लिया है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में निजी क्षेत्र की सहभागिता के लिए नीति का मसौदा 15 दिन के भीतर तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
गुरुवार को यहां शास्त्रीभवन में एक बैठक में मुख्य सचिव जावेद उस्मानी ने स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए निजी क्षेत्र का सहयोग लेने की बात कही।
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निजी क्षेत्र की सहभागिता के लिए नीति का प्रारूप 15 दिन के अंदर तैयार कर लिया जाए। आम लोगों को गुणवत्ता के साथ इलाज निजी क्षेत्र की मदद से ही उपलब्ध कराया जा सकता है।
इस मसौदे में पीपीपी मॉडल पर खुलने वाले अस्पतालों में इलाज और जांच की दर राज्य सरकार की सहमति से निर्धारित कराने की योजना बनाई गई है। निजी क्षेत्र को आकर्षित करने के लिए जरूरी सुविधाएं सरकार उन्हें मुहैया कराएगी।
मुख्य सचिव ने कहा कि स्वैच्छिक दानदाता, चैरिटेबल ट्रस्ट की मदद से मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं में उनके परिजनों के नाम से उपकरण, भवन, भूमि का उपयोग किया जाए।
इन अस्पतालों में एमआरआई, सीटी स्कैन, डायग्नोस्टिक यूनिट की स्थापना के लिए भी प्रस्ताव मांगने केलिए कहा। अस्पतालों में कैंटीन, रैन बसेरा, क्रेश, इमरजेंसी वाहन सेवा भी पीपीपी मॉडल पर उपलब्ध कराई जा सकती है।
यह सेवा उचित दर पर मरीजों को मिले, इसका ध्यान नीति बनाने में जरूर रखा जाएगा। इसकेलिए मॉनिटरिंग और गुणवत्ता नियंत्रण की व्यवस्था भी रहेगी।
जिला अस्पतालों में हाउस कीपिंग सर्विस, सुरक्षा आदि को भी इसमें शामिल किया जाए। बैठक में प्रमुख सचिव स्वास्थ्य प्रवीर कुमार, प्रमुख सचिव नियोजन संजीव मित्तल, एनएचआरएम निदेशक अमित घोष, सचिव वित्त मुकेश मित्तल मौजूद रहे।