खुद को अल्पसंख्यकों का मसीहा सिद्ध करने में लगी सपा सरकार की नजर अब अल्पसंख्यक आयोग पर टिक गई है।
अखिलेश सरकार मायावती सरकार के फैसले को पलटने जा रही है। इसके तहत भारी भरकम आयोग का आकार घटाया जाएगा।
प्रदेश सरकार आयोग का पुनर्गठन कर कई गैर जरूरी पद खत्म करेगी। साथ ही आयोग में नियुक्ति के लिए अल्पसंख्यक होने की बाध्यता फिर लागू की जाएगी।
अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा के लिए प्रदेश में अल्पसंख्यक आयोग बना है लेकिन सपा सरकार ने अभी तक इसके अध्यक्ष की नियुक्ति ही नहीं की है।
सरकार अब पहले आयोग का स्वरूप बदलना चाहती है। इसके बाद ही इसमें नियुक्तियां की जाएंगी। इससे पहले मायावती की सरकार ने आयोग का आकार काफी लंबा चौड़ा कर दिया था।
इसमें अध्यक्ष व सचिव के अलावा दो उपाध्यक्ष व 17 सदस्यों की बड़ी फौज एकत्र कर ली गई थी। इसी को अब प्रदेश सरकार सीमित करने जा रही है।
मायावती सरकार ने अल्पसंख्यक आयोग में नियुक्ति के लिए अल्पसंख्यक होने की बाध्यता खत्म कर दी थी। यानी अल्पसंख्यक आयोग में किसी को भी अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व सदस्य बनाया जा सकता था।
अखिलेश यादव सरकार अब इस निर्णय को पलटते हुए केवल अल्पसंख्यकों को ही आयोग में स्थान देने जा रही है। साथ ही उपाध्यक्ष का पद भी खत्म करने की तैयारी हो रही है।
प्रदेश सरकार सदस्यों की संख्या भी कम करने जा रही है। 17 सदस्यों की संख्या भी आधी करने की तैयारी है। सरकार इस महत्वपूर्ण फैसले को कैबिनेट के समक्ष रखेगी।
विभाग के अधिकारी इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव को अंतिम स्वरूप देने में लगे हैं। शीघ्र ही कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी जाएगी। आयोग के पुनर्गठन के बाद ही अध्यक्ष सहित अन्य पदों पर भी नियुक्तियां होंगी।