नई गाइडलाइन : हॉटस्पॉट इलाकों की गर्भवतियों का प्रसव क्वीन मेरी में - पता छिपाने वाले तीमारदारों को बाद में सुननी पड़ती हैं झिड़कियां केस 1 सदर निवासी हिसामुद्दीन बीते रविवार रात परिवार की महिला को प्रसव पीड़ा होने पर निजी अस्पताल ले गए। फिर गंज के महिला अस्पताल गए। इसके बाद डफरिन भेजा गया। वहां जैसे ही बताया कि सदर इलाके से आए हैं, तत्काल क्वीन मेरी रेफर कर दिया गया। सुबह वहां जांच के बाद वार्ड में भर्ती किया गया, लेकिन तब तक महिला रातभर चिल्लाती रही। बाद में रिपोर्ट निगेटिव आई। सामान्य प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा दोनों ठीक हैं। केस 2 कृष्णानगर का विजय शंकर बीते शुक्रवार शाम गर्भवती पत्नी को लेकर डफरिन पहुंचा। वहां पता बताते ही केजीएमयू के क्वीन मेरी अस्पताल भेज दिया गया। वहां देखने के बाद लौटा दिया गया। अगली सुबह दर्द बढ़ा तो दोबारा पहुंचे। इसके बाद जांच कराई गई। फिर एक निजी अस्पताल में प्रसव हुआ। माई सिटी रिपोर्टर लखनऊ। राजधानी के हॉटस्पॉट इलाकों की गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए अब क्वीन मेरी अस्पताल जाना पड़ेगा। यह फैसला नई गाइडलाइन के तहत लिया गया है। दरअसल, हॉटस्पॉट चिह्नित इलाकों में रहने वाली गर्भवती महिलाओं को दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है। इन्हें प्रसव के लिए एक से दूसरे अस्पताल की दौड़ लगानी पड़ रही है। इससे ये शारीरिक के साथ मानसिक पीड़ा भी झेल रही हैं। पहले हर इलाके की महिलाएं डफरिन अस्पताल सहित अन्य सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और बाल महिला चिकित्सालय जाती थीं। जिसके घर के नजदीक जो अस्पताल होता था, वहां जाना सुविधाजनक रहता था। हालांकि, अब नई गाइडलाइन के मुताबिक, हॉटस्पॉट इलाकों की गर्भवती को क्वीन मेरी अस्पताल भेजा जाता है। ऐसे में इनके तीमारदार जांच के डर से कई बार पता छुपाने की कोशिश भी करते हैं, लेकिन पंजीकरण में पकड़ में आ जाते हैं। ऐसे में उन्हें झिड़कियां भी सुननी पड़ती हैं। पता बदलने तक की कोशिश कर रहे डफरिन की एसआईसी डॉ. नीरा जैन बताती हैं कि नई गाइडलाइन के तहत कोरोना संक्रमित इलाकों की महिलाओं को क्वीन मेरी भेजा जा रहा है। प्रसव से पहले हर मरीज की पूरी हिस्ट्री ली जाती है। कई बार लोग गलत पता बताने की कोशिश करते हैं। ऐसे में उन्हें समझाया जाता है कि ये कदम उनकी बेहतरी के लिए उठाए जा रहे हैं। आने वाली महिलाओं के परिवार में किसी को कोरोना हुआ है या वह क्वारंटीन रहा है या परिवार में किसी की विदेश यात्रा की हिस्ट्री है तो उन्हें क्वीन मेरी भेजा जाता है। ये समस्याएं भी उठानी पड़ रहीं इन दिनों नियमित जांचें और अल्ट्रासाउंड नहीं हो पा रहा है। इसके अलावा बाहर निकलने पर संक्रमण का खतरा है। वहीं, प्रसव के दौरान मुंह पर मास्क लगाने से भी समस्या बढ़ जाती है। पहले गर्भावस्था में अस्पताल में भर्ती होने पर परिवारीजनों को साथ रहने की छूूट थी। प्रसव के बाद भी यह सुविधा थी, लेकिन बदली परिस्थितियों में प्रसूताओं को अकेले रहना पड़ रहा है। दूध पिलाते वक्त मास्क अनिवार्य डॉ. नीरा जैन बताती हैं कि अन्य इलाकों से आने वाली महिलाओं की भी प्रसव से पहले पूरी हिस्ट्री ली जाती है। गर्भवती और तीमारदार का गेट पर ही हाथ घुलवाया जाता है। अंदर सिर्फ एक तीमारदार को सैनिटाइज करने के बाद जाने दिया जाता है। हर दो घंटे बाद महिला का सैनिटाइजर से हाथ धुलाया जाता है। सभी के बेड दूर-दूर कर दिए गए हैं। दूध पिलाते वक्त मास्क अनिवार्य कर दिया गया है। घट गई प्रसव की संख्या राजधानी मेें प्रसव की संख्या करीब 50 फीसदी घट गई है। इसके पीछे मूल वजह बाहरी जिलों से महिलाओं का न आना बताया जा रहा है। डफरिन में पहले जहां 20 से 25 प्रसव होते थे, अब यह संख्या 10 से 12 हो गई है। इसमें करीब सात सिजेरियन होते हैं। इसी तरह क्वीन मेरी में प्रसव का आंकड़ा 40 से 20 आ गया है। यही स्थिति अन्य अस्पतालों की भी है। अब तक नहीं मिला कोई पॉजिटिव केस क्वीन मेरी की एमएस डॉ. एसपी जैसवार ने बताया कि अभी तक कोई पॉजिटिव केस नहीं आया है। छह संदिग्ध मरीजों के प्रसव कराए गए। रिपोर्ट निगेटिव आने से राहत मिली। डॉ. जैसवार बताती हैं कि कोरोना के संदिग्ध, हॉटस्पॉट इलाके और पॉजिटिव मरीजों के लिए तय किया है कि किसी भी मरीज के संदिग्ध होने की स्थिति में उसे फीवर क्लीनिक में भेजकर जांच कराई जाएगी। इंतजार की स्थिति है तो अलग वार्ड में रखा जाएगा। तत्काल प्रसव कराने की जरूरत है तो न्यूरोलॉजी विभाग में बनी ओटी नंबर तीन का इस्तेमाल किया जाएगा। चिकित्सक और कर्मियों का वार्ड और ओटी में जाने के लिए अलग से रास्ता तय किया गया है। पॉजिटिव मरीज की क्वीन मेरी में कोई जांच नहीं की जाएगी। लेबर रूम के लिए यह व्यवस्था संदिग्ध या पॉजिटिव महिला के प्रसव के दौरान पूरी टीम पीपीई किट पहनेगी। रिपोर्ट पॉजिटिव है तो प्रसव होने के बाद प्रसूता को आइसोलेशन में रखा जाएगा। स्टाफ भी क्वारंटीन होगा। ओटी को सैनिटाइज करने के बाद ही दूसरी प्रसूता को लाया जाएगा। सिजेरियन की स्थिति में संदिग्ध होने के बाद भी पॉजिटिव केस जैसे प्रोटोकॉल का पालन होगा। ओटी से लेकर वार्ड तक हाइपोक्लोराइड से धुला जाएगा। सारी कवायद भलाई के लिए महिला कोरोना संदिग्ध या पॉजिटिव है तो उसे आइसोलेशन में भेजना जरूरी है। इससे तनाव बढ़ सकता है, लेकिन प्रसूता को धैर्य रखना चाहिए। सारी कवायद उनकी बेहतरी के लिए की जा रही हैं। - डॉ. प्रांजल अग्रवाल, मनोचिकित्सक