सवाल: वित्तीय संसाधन बढ़ाने पर विचार के लिए मुख्यमंत्री के निर्देश पर वित्तमंत्री की अध्यक्षता में समिति गठित की गई थी। इसमें विशेषज्ञ भी शामिल थे। इसकी केवल एक बैठक हुई। उस बैठक के क्या नतीजे आए, कुछ भी नजर नहीं आया। इस तरह संसाधन बढ़ाने के नतीजे कैसे आएंगे?
जवाब: वित्तीय संसाधन बढ़ाने के लिए पूरे फोकस के साथ काम होगा। इस कमेटी के बारे में पता करेंगे। जहां गाड़ी पटरी से उतर रही है या पटरी पर नहीं है, दोनों ही स्थितियों को दुरुस्त करेंगे। हमारे पास न कोई कमजोरी है और न मजबूरी। मुख्यमंत्री ने जो भरोसा दिखाया है, उस पर खरा उतरेंगे। चालू वित्त वर्ष में अनुपूरक सहित बजट का आकार 4.91 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है। इसमें लगातार वृद्धि होगी।
सवाल: सरकार बजट देती है लेकिन प्रशासकीय विभाग तमाम खर्चों का हिसाब तक नहीं देते। मई 2019 तक यह रकम बढ़कर 52,917 करोड़ पार कर गई। सीएजी वित्त विभाग को पत्र लिखता है और वित्त विभाग अन्य विभागों को, लेकिन यह राशि बढ़ती ही जा रही है। इसके लिए क्या करेंगे?
जवाब: वित्तीय अनुशासन कायम रखना शीर्ष प्राथमिकता होगी। ये बातें अपर मुख्य सचिव वित्त को बता दी गई हैं। मैं व्यक्तिगत रूप से ऐसे मामलों की नियमित समीक्षा करूंगा। जवाबदेही भी तय की जाएगी।
सवाल: वेतन समिति ने कर्मचारियों के भत्तों व विभिन्न संवर्गों की वेतन विसंगतियों को दूर करने के लिए सुझाव दिए। विभाग निर्णय नहीं ले रहा है जिससे कर्मचारियों में आक्रोश बढ़ रहा है। मुख्य सचिव समिति का गठन भी गठित नहीं हुआ। इससे कर्मचारियों की लंबित समस्याओं पर निर्णय नहीं हो पा रहे हैं।
जवाब: कर्मचारी सातवें वेतन का लाभ पा रहे हैं। उनके ‘लिवलीहुड’ का स्तर ठीक है। जो भी मांग या समस्या आएगी, उस पर गुण-दोष के आधार पर निर्णय लिया जाएगा। किसी भी स्तर पर भेदभाव नहीं होगा।
सवाल: वित्त विभाग में वर्ष भर तबादले चलते रहते हैं। समय-समय पर तबादलों पर सवाल उठते रहे हैं?
जवाब: तबादले समय से हों, यह सुनिश्चित किया जाएगा।