लखनऊ विश्वविद्यालय का एक वर्षीय परास्नातक कोर्स 40 क्रेडिट का होगा। इसमें दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों को प्रति सेमेस्टर 20 क्रेडिट मिलेंगे। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) और नई शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत पीजी इस शैक्षणिक सत्र पाठ्यक्रम के लिए तय गाइडलाइन के हिसाब तैयार किए गए पीजी अध्यादेश को लखनऊ विश्वविद्यालय ने स्वीकृति दे दी है। एक वर्षीय पीजी पाठ्यक्रम में प्रवेश के प्रारूप को लेकर विवि जल्द ही दिशा निर्देश जारी करेगा।
लविवि में वर्तमान में दो वर्षीय पीजी पाठ्यक्रम संचालित है। नए शैक्षणिक सत्र से छात्रों को एक वर्ष का पीजी कोर्स करने की भी सुविधा मिलेगी। हालांकि, इसके लिए चार वर्षीय स्नातक करने वाले छात्र-छात्राओं को 75 प्रतिशत से ऊपर अंक लाने होंगे। इससे कम अंक वालों के लिए दो साल का ही पीजी कोर्स करने का विकल्प रहेगा।
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डीन एकेडमिक्स प्रो. गीतांजलि मिश्रा के मुताबिक अभी तक दो साल के पीजी कोर्स में प्रति सेमेस्टर छात्र को 24 क्रेडिट दिए जाते थे, लेकिन नए अध्यादेश में प्रति सेमेस्टर 20 क्रेडिट मिलेंगे। एक वर्षीय परास्नातक कोर्स में भी यही नियम लागू होगा। इसमें एक सेमेस्टर के लिए 20 क्रेडिट तय हैं, जो दोनों सेमेस्टरों का कुल 40 क्रेडिट होगा।
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यह है क्रेडिट सिस्टम: एनईपी में क्रेडिट सिस्टम किसी भी शैक्षिक कार्यक्रम को मापने का व्यवस्थित तरीका है। यह किसी विषय से संबंधित कार्यभार है, जिसमें तय होता है कि छात्र को कितना अध्ययन करना है। उदाहरण के लिए एक विद्यार्थी को एक प्रणाली में 14 क्रेडिट हासिल करने के लिए प्रयोगशाला में 28 घंटे पूरे करने होते हैं। यहां दो घंटे के प्रैक्टिकल में उसे एक क्रेडिट दिया जाता है। लविवि की डीन एकेडमिक्स प्रो. गीतांजलि ने बताया कि एक वर्षीय परास्नातक कोर्स में विद्यार्थी को 40 क्रेडिट पढ़ने होंगे, जबकि दो वर्ष के पीजी में 80 क्रेडिट। पहले दो वर्षीय पीजी 96 क्रेडिट का होता था। यूजीसी के मुताबिक, एक क्रेडिट में विद्यार्थी को 15 घंटे पढ़ना होता है और सेमेस्टर में 15 सप्ताह। विद्यार्थी कितने घंटे पढ़ाई करेगा यह क्रेडिट पर निर्भर होगा।
चार क्रेडिट का होता है एक पेपर : लविवि में एनईपी के अंतर्गत सभी पाठ्यक्रमों में एक पेपर के लिए अधिकतम चार क्रेडिट और न्यूनतम दो क्रेडिट निर्धारित हैं। यानी विद्यार्थी को प्रत्येक सेमेस्टर में एक पेपर को 60 घंटे पढ़ना होगा। प्रैक्टिकल पेपर में यह संख्या ठीक दोगुनी हो जाती है।