डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ की लापरवाही से नवजात की मौत हो गई। लापरवाही से नाराज परिवार वालों ने जमकर हंगामा किया।
परिवार वालों के मुताबिक प्रसव के बाद भी डॉक्टर शिशु की जांच के लिए नहीं पहुंचे। आखिरकार 24 घंटे बाद डॉक्टरों ने उसकी खराब हालत देखते हुए उसे केजीएमयू रेफर कर दिया। वहां भी उसका इलाज नहीं हुआ।
इसके चलते उसकी मौत हो गई। गोमती नगर स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में अमराई के तकरोही गांव के प्रवेश वर्मा ने 2 अगस्त को अपनी पत्नी शोभा वर्मा (29) को भर्ती कराया था।
प्रवेश ने बताया कि स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. सरिता सक्सेना ने जांच के बाद बताया कि उसकी पत्नी को प्रसव पीड़ा नहीं हो रही है। इसलिए उसका सीजेरियन प्रसव करा ले।
डॉक्टर की बात मानकर प्रवेश ने पत्नी का ऑपरेशन करा लिया। उसी दिन शाम को शोभा ने एक शिशु को जन्म दिया। इसके बाद उसे वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया।
अगले दिन 3 अगस्त को डॉ. सरिता सक्सेना और डॉ. संजीव सरन जच्चा-बच्चा की जांच करने आए। जांच के बाद उन्होंने बच्चे को संक्रमण की चपेट में आने की जानकारी दी और कहा कि इसे तुरंत केजीएमयू ले जाओ।
इसके बाद बच्चे को कागजी कार्रवाई होने तक नियो नेटल इंटेंसिव केयर यूनिट (एनआईसीयू) में भर्ती कर दिया। रेफर के कागज बनने के बाद उसे केजीएमयू भेज दिया गया।
प्रवेश ने बताया कि केजीएमयू के बाल रोग विभाग में बेड न होने के कारण उन्हें वापस लौटा दिया गया। परिजनों ने भागदौड़ कर किसी तरह अलीगंज स्थित एक निजी अस्पताल में बच्चे को भर्ती कराया। जहां उसे वेंटीलेटर लगाया गया। बृहस्पतिवार सुबह तीन बजे उसकी की मौत हो गई।
लोहिया अस्पताल में शुरुआती दौर में की गई लापरवाही से नाराज परिजन बृहस्पतिवार सुबह लोहिया अस्पताल के सीएमएस डॉ. आरसी अग्रवाल से शिकायत करने पहुंचे थे। जब वे नहीं मिले तो नाराज परिवार वालों ने अस्पताल प्रशासन और डॉक्टरों के खिलाफ नारेबाजी करनी शुरू कर दी।
परिवार वाले लापरवाही के आरोपी डॉक्टरों पर कार्रवाई की मांग कर रहे थे। अस्पताल में हंगामे की सूचना पाकर मौके पर पहुंचे अधीक्षक डॉ. एमएल भार्गव को परिवार वालों ने डॉक्टरों के खिलाफ लिखित शिकायत देकर कार्रवाई करने की मांग की। जिसपर उन्होंने आश्वासन देकर उन्हें शांत कराया।