स्नेह की डोर कितनी मजबूत होती है, इसका जीता जागता उदाहरण देखना हो तो एक बार ट्रॉमा सेंटर तक हो आइए। यहां भर्ती नवजात जुड़वा बच्चियों को देख इंसानियत पर आपका भरोसा और गहरा हो जाएगा।
अपनों की ठुकराई इन बच्चियों की तबीयत में गैरों के स्नेह की बदौलत सुधार होने लगा है। उन्हें बृहस्पतिवार को वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। बच्चियों ने दूध पीना शुरू कर दिया है।
ये वही बच्चियां हैं जिन्हें जन्म देकर बीते दिनों मां चल बसी और पिता गंभीर हालत में अनाथ छोड़ गया। एक निजी संस्था ने उन्हें अस्पताल तक पहुंचाया।
लीलावती बाल सदन की एक सहायिका 24 घंटे उनकी तीमारदारी में लगी है। इसके अलावा डॉक्टरों ने भी बच्चियों को बचाने के लिए दिन-रात एक कर दिया।