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‘आगाज’ एप सिखाएगा शायरी की बारीकियां, राजधानी के युवा शायरों की पहल नए रचनाकारों के लिए बनेगी मददगार

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हर्षित मिश्रा - फोटो : ??? ?????
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अभिषेक सहज
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गजल सुनना खुद को सुकून देना है, लेकिन गजल कहना इतना आसान नहीं है। सोशल मीडिया ने कुछ वर्षों में गजल के दायरे को बढ़ाया है। हजारों युवा इन दिनों शायरी कर रहे हैं, लेकिन इनमें से बहुत से लोग इसकी बारीकियों से वाकिफ नहीं हैं। हर किसी के पास इन्हें सिखाने के लिए उस्ताद नहीं हैं। ऐसे में राजधानी के दो युवा शायर शाहबाज तालिब और हर्षित मिश्रा ने एक ऐसा एप ‘आगाज’ तैयार किया है, जो नए रचनाकारों को न सिर्फ शायरी के गुर सिखाएगा, बल्कि बहर में शेर, गजल और नज्म लिखने में उनकी मदद भी करेगा।
शाहबाज और हर्षित ने बताया कि यह एप नए रचनाकारों को बहर में शायरी करने में मदद करता है और गजल का बुनियादी उसूल तकती (मात्रा गणना) सीखने में फायदेमंद साबित होगा। इस एप्लीकेशन की शुरुआत गणतंत्र दिवस के मौके पर 26 जनवरी से की जा रही है।
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मनपसंद बहर चुनकर गजल कहने की सहूलियत
हर्षित मिश्रा ने बताया कि आगाज एप की एक और खासियत यह है कि जिन्हें तकती का ज्ञान है, वे मनपसंद बहर चुनकर उसमें अपने ख़याल को गजल में ढाल सकते हैं। इसके अलावा बहर में वज्न गिराने की सहूलियत है और अलिफ वस्ल (संधि) और जिहाफ (रुक्न परिवर्तन) भी कर सकते हैं।
सभी बहर के साथ मशहूर गजलों का भी खजाना
शाहबाज तालिब ने बताया कि इस एप से कोई भी पसंदीदा शायर की किसी गजल की बहर अरकान, तकती, अलिफ, वस्ल आदि मालूम कर सकता है। इसके लिए यूजर को एक मिसरा चेक बहर सेक्शन टाइप कर क्लिक करना होगा। एप में सभी बहरें मौजूद हैं। इनमें लिखीं मशहूर गजलें भी एप में हैं।
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विशेषज्ञों से रिव्यू की भी सुविधा उपलब्ध
हर्षित और शाहबाज ने कहा कि इस एप में रिव्यू सेक्शन की मदद से यूजर्स को विशेषज्ञों से रिव्यू जानने की भी सुविधा मिलेगी। इसके लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। बताया कि आगाज एप को एंड्राइड प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध गूगल प्ले स्टोर से नि:शुल्क डाउनलोड कर सकते हैं या फिर aaghaz.in वेबसाइट के जरिये इसका प्रयोग कर सकते हैं।

शाहबाज तालिब

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