लखनऊ। सुबह की हल्की रोशनी जैसे ही पुराने शहर पर उतरती है, नक्खास बाजार की गलियों में परिंदों की चहचहाहट गूंज उठती है। अब यह चहचहाहट जंगलों या खुले आंगनों से नहीं, बल्कि घरों के कमरों से निकलकर बाजार तक पहुंचती है। कानून की सख्ती के बीच परिंदों से मोहब्बत ने नया ठिकाना ढूंढ लिया है... कमरों में बसते घोंसले।
आज नक्खास में बिकने वाले ज्यादातर परिंदों की आपूर्ति घरों से होती है। किसी कमरे की दीवार पर मिट्टी की हांडियां टंगी हैं तो कहीं रोशनी और तापमान का संतुलन साधा जा रहा है। इन्हीं कमरों में परिंदे अंडे देते हैं, बच्चे निकलते हैं और फिर वही चहचहाहट पिंजरों में सिमटकर बाजार तक पहुंचती है। करीब 15 से 20 परिवारों की रोजी-रोटी अब भी इसी चहचहाहट से जुड़ी हुई है।
बजरीगर हों या लव बर्ड (पालतू तोते), सफेद कबूतर हों या रंगीन फाख्ता, फिंच, मुनिया और कैनरी... हर परिंदा यहां अपनी पहचान रखता है। 65 वर्षीय कारोबारी नवाब बताते हैं कि कभी देसी और पहाड़ी तोते आम थे लेकिन अब वे कानून की दीवारों के पीछे रह गए हैं। जो जायज है, वही बाजार में बचा है और उसी में यह विरासत सांस ले रही है।
महंगे हुए पर, शौक खत्म नहीं हुआ
वक्त बदला, कानून सख्त हुआ और मोबाइल ने लोगों को परों की आवाज से दूर कर दिया लेकिन परिंदों से जुड़ा शौक पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। नक्खास बाजार की रौनक भले ही पहले जैसी न हो, पर परिंदों से मोहब्बत अब भी कायम है। पिछले साल की तुलना में लगभग सभी पक्षियों के दामों में 25 से 30 फीसदी तक इजाफा हुआ है। बजरीगर पक्षी का जोड़ा जो पहले 250 से 300 रुपये में मिल जाता था, अब करीब 400 रुपये का हो गया है। वहीं लव बर्ड का जोड़ा 1200-1500 रुपये से बढ़कर अब 2000 रुपये तक पहुंच गया है। यही हाल लगभग सभी प्रजातियों के पक्षियों का है।
मनोकामना पूरी होने पर कबूतर या मुनिया उड़ाने की मानते हैं मन्नत
कारोबारी लालाराम कहते हैं, शौक कम हुआ है, मिटा नहीं। बच्चे हों या बुजुर्ग, आज भी लोग लव बर्ड और बजरीगर देखकर रुक जाते हैं। नक्खास में शौक के साथ आस्था भी बिकती है। कई लोग मनोकामना पूरी होने पर कबूतर या मुनिया उड़ाने की मन्नत मानते हैं। मुराद पूरी होती है तो पिंजरा खुलता है और परिंदा आसमान में आजाद हो जाता है।
कानून की सख्ती और बदलते दौर के बावजूद नक्खास आज भी लखनऊ की उस तहजीब की कहानी कहता है, जहां परिंदों की चहचहाहट सिर्फ शौक नहीं, एक अहसास हुआ करती थी।
राजधानी के नक्खास बाजार में लगा पक्षियों का बाजार। -संवाद
राजधानी के नक्खास बाजार में लगा पक्षियों का बाजार। -संवाद
राजधानी के नक्खास बाजार में लगा पक्षियों का बाजार। -संवाद