एडवा के कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में शामिल महिलाएं।
लखनऊ। घरेलू कामगार महिला संगठन के कन्वेंशन में बुधवार को महिला कामगारों ने समस्याएं गिनाईं। उन्होंने कहा कि काम का न तो उचित मूल्य और न ही सम्मान मिलता है। इस दौरान प्रस्ताव पेश कर इन महिलाओं के हित में केंद्रीय कानून बनाने की मांग उठाई गई।
मानवाधिकार दिवस पर विधानसभा रोड स्थित एडवा के कार्यालय में आयोजित घरेलू कामगार महिला संगठन के कन्वेंशन में पुष्पक ट्रेन में ठेके पर सफाई का काम करने वाली सोनी ने बताया कि महिलाएं बोगियों में फिनायल से पोछा लगाने से लेकर परफ्यूम छिड़कने का काम तक करती हैं। इसके बाद भी भेदभाव की शिकार हैं। महिलाओं को सात हजार रुपये महीना और पुरुषों को 10 हजार रुपये महीना दिया जाता है। चोटिल होने पर इलाज में अपना ही पैसा लगाना पड़ता है।
मीरा ने बताया कि जिनके घर काम करते हैं, वे पैसे तो कम देते ही हैं, सम्मान भी नहीं करते। सुशीला ने बताया कि गांव में छुटटा जानवरों की वजह से खेती करना मुश्किल था। ऐसे में शहर आना पड़ा, लेकिन यहां भी शोषण है। संगठन की अध्यक्ष मीरा देवी की अध्यक्षता में हुए कार्यक्रम में संगठन की सचिव स्मिता पांडेय ने प्रस्ताव पेश किया। इसमें मंहगाई के हिसाब से वेतन बढ़ाने, पेंशन, अवकाश आदि तय करने के लिए केंद्रीय कानून बनाने की मांग की गई। एडवा की राष्ट्रीय संयुक्त सचिव मधु गर्ग ने कहा कि घरों की व्यवस्था की धुरी घरेलू कामगार महिलाएं हैं। इनकी ओर न सरकार और न ही समाज का ध्यान है। कार्यक्रम का संचानल वंदना राय ने किया। मौके पर सुमन सिंह, रूबी, सुनीता, अफसाना, रामकली आदि ने समस्या बताई।
एडवा के कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में शामिल महिलाएं।
एडवा के कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में शामिल महिलाएं।
एडवा के कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में शामिल महिलाएं।