अमर उजाला से बातचीत में मुक्तेश तन्मय ने कहा कि मैंने लक्ष्य साधकर पढ़ाई की। पढ़ाई के घंटे तय नहीं किए और जो अच्छा लगा वह पढ़ा। जब पढ़ने बैठा तो चैप्टर खत्म करके ही उठा। मुझे और अच्छी रैंक आने की उम्मीद थी, पर परीक्षा काफी कठिन थी। एम्स दिल्ली से एमबीबीएस की पढ़ाई करने की इच्छा है। अभी विशेषज्ञता के लिए कुछ तय नहीं किया है। मेरे पिता संजय कुमार फतेहपुर के केंद्रीय विद्यालय में प्रधानाचार्य और मां निर्मला गृहिणी हैं। नीट की तैयारी कर रहे युवाओं से कहूंगा कि समय का प्रबंधन कर पढ़ाई करें। इस बार की परीक्षा में यह ज्यादा व्यावहारिक दिखा। ऐसे सवाल पूछे गए, जिनमें ज्यादा समय लगा। ऐसे में प्रश्नपत्रों के अभ्यास पर अधिक ध्यान दें। सिलेबस को देखकर घबराए नहीं। सिलेबस को समय से पहले खत्म करें, ताकि तैयारी का ज्यादा मौका मिले। यह कतई नहीं कहूंगा कि इंटरनेट या समाज से कट जाएं। सोशल मीडिया का इस्तेमाल पढ़ाई के लिए करें।
सेल्फ स्टडी, मॉक टेस्ट ने दिलाई सफलताः अनंत
परीक्षा की तैयारी के दौरान सेल्फ स्टडी करने के साथ खूब मॉक टेस्ट दिए। इसने नीट में सफलता दिलाने में योगदान दिया। इसके अलावा कोचिंग में जो पढ़ाया जाता था, उसका घर पर रिवीजन जरूर करता था। रोजाना औसतन 10 घंटे पढ़ाई की। मेरे पिता बृजेश कुमार बैंक मैनेजर थे। वर्ष 2020 में उनका निधन हो गया। मां प्रमिला कुमारी बैंक में क्लर्क हैं। प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थान से एमबीबीएस की पढ़ाई करना चाहता हूं। बेहतर डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करूंगा।